अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का परचम, बैकफुट पर आई रिपब्लिकन पार्टी

संयुक्त राज्य अमेरिका के बहुचर्चित और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) के नतीजे सामने आने के साथ ही अमेरिकी राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में कड़े मुकाबले के बीच करारा झटका लगा है। संसद के दोनों महत्वपूर्ण सदनों—प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate)—में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत और नियंत्रण हासिल करने की दिशा में ऐतिहासिक बढ़त बना ली है। इस अप्रत्याशित और एकतरफा जनादेश के शुरुआती रुझान सामने आते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पार्टी की पराजय को स्वीकार करने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। इस हार के बाद जहां विपक्षी खेमे में भारी उत्साह का माहौल है, वहीं व्हाइट हाउस के लिए अगले दो वर्षों में विधायी कामकाज चलाना और अपनी नीतियों को लागू कराना एक अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य बनने जा रहा है।
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चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी मध्यावधि चुनाव हमेशा मौजूदा राष्ट्रपति के कामकाज और नीतियों पर जनता के जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के रूप में देखे जाते रहे हैं। इस बार के मतदान में देश के भीतर बढ़ती महंगाई, विदेश नीति और सामाजिक मुद्दों को लेकर मतदाताओं का गुस्सा साफ तौर पर मतपेटियों में झलका है। रिपब्लिकन पार्टी संसद के निचले सदन में अपना मामूली बहुमत बचाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। देश भर से आ रहे आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी जनता ने शक्ति के संतुलन (Check and Balance) को प्राथमिकता देते हुए संसद की चाबी विपक्षी डेमोक्रेट्स के हाथों में सौंपने का ऐतिहासिक फैसला किया है।
'अगर मैं मैदान में होता तो बंपर जीत दर्ज करते', ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर तोड़ी चुप्पी
चुनावी नतीजों में पार्टी के पिछड़ने के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी पहली विस्तृत और आक्रामक प्रतिक्रिया दर्ज कराई। ट्रंप ने चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन से पल्ला झाड़ते हुए सीधे तौर पर कहा कि इस पूरे चुनाव में वे व्यक्तिगत रूप से उम्मीदवार के तौर पर मैदान में नहीं थे। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "इस चुनाव में मैं उम्मीदवार नहीं था! अगर मैं खुद चुनावी दौड़ में शामिल होता और मेरा नाम मतपत्र पर होता, तो हम बहुत बड़े अंतर और भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज करते!" हालांकि राजनीतिक समीक्षकों ने तुरंत यह याद दिलाया कि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने देश भर की जनसभाओं में जनता से यह भावुक अपील की थी कि वे वोट डालते समय यह मानकर चलें कि हर सीट पर वे खुद उम्मीदवार हैं और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को दिया गया हर वोट सीधे उनके नाम पर जा रहा है।
इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में बेहद गंभीर और यथार्थवादी रुख अपनाते हुए अपनी पार्टी की पराजय को खुले तौर पर स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "मैं इन चुनावी नतीजों को पूरी तरह से स्वीकार करने के लिए तैयार हूं। हम परिणाम से मुंह नहीं मोड़ सकते। डेमोक्रेट्स अब हाउस और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल करने की बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं। हम भविष्य में डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं और उनके साथ बातचीत करने को लेकर हम उत्साहित हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि देशहित में हम दोनों पक्ष बातचीत के जरिए कोई न कोई सकारात्मक रास्ता जरूर निकाल लेंगे।" ट्रंप का यह बदला हुआ सुलहवादी लहजा यह दर्शाता है कि विभाजित कांग्रेस के सामने उन्हें अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए समझौते करने ही होंगे।
प्रतिनिधि सभा और सीनेट के चुनावी आंकड़ों की स्थिति: डेमोक्रेट्स ने बनाई निर्णायक बढ़त
मंगलवार को संपन्न हुए इस महा-मुकाबले में अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 सीटों पर एक साथ मतदान कराया गया था। चुनाव से ठीक पहले तक हाउस में रिपब्लिकन पार्टी के पास बेहद संकीर्ण बहुमत था, जहां पार्टी के पास 218 सीटें और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें थीं। शुरुआती मतगणना के रुझानों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी 147 से अधिक प्रमुख सीटों पर भारी बढ़त बनाते हुए कई अहम बैटलग्राउंड जिलों में रिपब्लिकन सांसदों को पराजित करने में सफल रही है। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी केवल 88 सीटों पर ही आगे चल पाई, जिससे यह साफ हो गया कि निचले सदन का स्पीकर पद अब डेमोक्रेट्स की झोली में जाने वाला है।
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उच्च सदन यानी सीनेट की बात करें तो कुल 100 सदस्यों वाली सीनेट में से 35 सीटों पर इस बार मतदान हुआ था। सीनेट में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 51 सीटों का होता है। मतदान से पहले सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें थीं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 सीटें और 2 निर्दलीय सांसद थे जो हमेशा डेमोक्रेट्स के साथ गठबंधन में रहते हैं, जिससे प्रभावी अनुपात 53-47 का था। इस बार हुए सीनेट चुनावों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों ने कई कांटे की टक्कर वाली सीटों पर बढ़त बना ली है। इससे अमेरिकी संसद की विधायी शक्ति पूरी तरह से डेमोक्रेटिक पार्टी के पाले में खिसकती हुई दिखाई दे रही है, जो राष्ट्रपति के लिए नई नीतियां लागू करने और बजट पास कराने में सबसे बड़ा संवैधानिक अवरोध बनेगी।
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फ्लोरिडा में गवर्नर पद पर बायरन डोनाल्ड्स का कब्जा, भारतवंशी पिया डांडिया ने संसद में रचा इतिहास
इस राष्ट्रीय उलटफेर के बीच कुछ राज्यों से बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक व्यक्तिगत परिणाम भी सामने आए हैं। फ्लोरिडा के अत्यंत महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल गवर्नर चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के तेजतर्रार नेता बायरन डोनाल्ड्स ने शानदार जीत दर्ज की और राज्य की कमान अपने नाम कर ली। बायरन डोनाल्ड्स की यह जीत रिपब्लिकन पार्टी के लिए उस तटीय राज्य में एक बड़ी राहत लेकर आई, जहां पार्टी ने अपनी पुरानी पकड़ को मजबूत बनाए रखा।
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वहीं दूसरी तरफ, भारतीय प्रवासियों और दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए फ्लोरिडा से ही एक अत्यंत गौरवमयी और ऐतिहासिक खबर सामने आई। फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से प्रतिनिधि सभा की प्रतिष्ठित सीट पर भारतीय मूल की प्रतिभाशाली नेता पिया डांडिया ने शानदार जीत हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है। रीड्रॉ किए गए कठिन चुनावी क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद पिया डांडिया ने अपने जमीनी प्रचार, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और शिक्षा सुधार के मुद्दों के दम पर मतदाताओं का दिल जीत लिया। उनकी इस ऐतिहासिक विजय ने अमेरिकी संसद के भीतर भारतवंशियों के लगातार बढ़ते प्रभाव, विविधता और लोकतांत्रिक ताकत को एक बार फिर वैश्विक पटल पर प्रमाणित कर दिया है।