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पाकिस्तान के ‘दर्रा आदम खेल’ से भारत में आ रहे सस्ते विदेशी हथियार

सीमा पार से भारत की आंतरिक सुरक्षा को सेंध लगाने की एक और खतरनाक और सनसनीखेज साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में स्थित 'दर्रा आदम खेल' (Darra Adam Khel) इन दिनों अवैध और नकली हथियारों का एक बड़ा वैश्विक केंद्र बन चुका है। यह वही इलाका है जहां ऑस्ट्रिया की मशहूर 'ग्लॉक' (Glock) और तुर्की की अत्याधुनिक 'जिगाना' (Zigana) जैसी घातक विदेशी पिस्तौलों और एके-47 राइफलों की हूबहू 'फर्स्ट कॉपी' कौड़ियों के भाव तैयार की जा रही हैं। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के खुलासे के अनुसार, पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय हथियार माफिया इन घातक अवैध हथियारों को ड्रोन (Drone Smuggling) के जरिए पंजाब की सीमाओं में गिरा रहा है, जहां से यह पूरे भारत के खूंखार गैंगस्टरों और स्थानीय अपराधियों तक पहुंच रहे हैं। चिंता की बात यह है कि मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और प्रयागराज में हुए अतीक-अशरफ हत्याकांड में भी इसी तरह सीमा पार से तस्करी कर लाए गए हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

कैसे काम करती है दर्रा आदम खेल की अवैध गन फैक्ट्री और भारत में तस्करी का नेटवर्क?

पाकिस्तान का दर्रा आदम खेल इलाका दशकों से अपने हाथों से बने हथियारों के कुटीर उद्योग के लिए कुख्यात रहा है। हालांकि, अब वहां की स्थानीय वर्कशॉप्स में लेजर कटिंग, आधुनिक सीएनसी (CNC) मशीनों और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके ऑस्ट्रिया, तुर्की, अमेरिका और इटली जैसे देशों के ब्रांडेड हथियारों की हुबहु कॉपी बनाई जा रही है। ये हथियार देखने और काम करने में बिल्कुल असली विदेशी पिस्तौलों की तरह होते हैं, लेकिन इनकी कीमत असली की तुलना में बहुत कम होती है। पाकिस्तान में 8 हजार से 20 हजार रुपये में मिलने वाली ग्लॉक और जिगाना पिस्तौलें तथा 25 हजार से 50 हजार रुपये की एके-47 राइफलें भारत में ड्रोन और तस्करों के स्थानीय सिंडिकेट के जरिए अपराधियों को सप्लाई की जा रही हैं।

सिद्धू मूसेवाला और अतीक-अशरफ हत्याकांड में प्रयोग हुए थे यही हथियार

भारतीय पुलिस और जांच एजेंसियों (जैसे एनआईए और पंजाब पुलिस) की जांच में यह बार-बार साबित हो चुका है कि देश में हुए कई हाई-प्रोफाइल मर्डर केसों में दर्रा आदम खेल की इसी अवैध मंडी के हथियार इस्तेमाल किए गए हैं। मई 2022 में मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या के दौरान हमलावरों ने जिन स्वचालित पिस्तौलों का इस्तेमाल किया था, उनमें से कई हथियार पाकिस्तान से इसी नेटवर्क के जरिए पंजाब पहुंचे थे। ठीक इसी तरह, अप्रैल 2023 में प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने वाले शूटर्स के पास से बरामद हुई अत्याधुनिक 'जिगाना' पिस्तौल भी इसी पाकिस्तानी स्मगलिंग रूट का हिस्सा थी।

भारत के गैंगस्टरों के लिए क्यों बने ये सस्ते हथियार पहली पसंद?

भारतीय बाजारों में जहां अवैध देशी कट्टे या मुंगेर मेड पिस्तौल की गुणवत्ता कई बार भरोसेमंद नहीं होती, वहीं पाकिस्तान के दर्रा आदम खेल में बनी फर्स्ट कॉपी विदेशी गन कम कीमत में जबरदस्त फायरिंग क्षमता देती हैं। एक साधारण स्मार्टफोन की कीमत में मिलने वाली इन पिस्तौलों की मैगजीन में 15 से 30 गोलियां एक साथ लोड हो सकती हैं। यही वजह है कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के लॉरेंस बिश्नोई, बंबीहा और अन्य आपराधिक गैंग्स इन सस्ते और घातक हथियारों को लगातार खरीद रहे हैं। ड्रोन के जरिए खेतों में गिराए गए पैकेट्स को स्थानीय कोरियर और ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) उठाकर पूरे देश में डिलीवर कर देते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी और सीमा पर एंटी-ड्रोन ग्रिड की तैनाती

पाकिस्तान की इस नापाक हरकत और नादिरशाही तस्करों के नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF), पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भारत-पाक सीमा पर सर्विलांस बढ़ा दिया है। एंटी-ड्रोन सिस्टम्स (Anti-Drone Systems) और नाइट विजन कैमरों की मदद से ड्रोन घुसपैठ को नाकाम किया जा रहा है। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस अंतर-राज्यीय आर्म्स सिंडिकेट पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर दर्जनों तस्करों को दबोच रही है ताकि इन घातक हथियारों की सप्लाई चेन को जड़ से खत्म किया जा सके।

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