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प्रशांत भूषण पर दिल्ली पुलिस की गाज: विदेश मंत्री का फर्जी वीडियो शेयर करने पर FIR दर्ज

वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की मुश्किलें कानूनी शिकंजे में फंसने के बाद काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के नामचीन वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ भारत विरोधी और भ्रामक फर्जी वीडियो शेयर करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। यह विवाद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से जुड़े एक कथित एडिटेड वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करने के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि रूसी विदेश मंत्री ने भारत के आंतरिक मामलों और रूसी तेल खरीद पर भारत सरकार की आलोचना की है। हालांकि विदेश मंत्रालय (MEA) की फैक्ट चेक यूनिट और रूसी दूतावास द्वारा इस वीडियो को पूरी तरह से फर्जी और मॉर्क्ड बताए जाने के बाद स्पेशल सेल ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए एफआईआर दर्ज की है।

प्रशांत भूषण का विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट और तीखा दावा

पूरा मामला तब तूल पकड़ गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की एक वीडियो क्लिप शेयर की। इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रशांत भूषण ने कैप्शन में दावा किया था कि "यह रूस के विदेश मंत्री का भारत के मुंह पर करारा तमाचा है। जयशंकर रूस को किस तरह की सलाह दे रहे थे?" इस वीडियो क्लिप में सर्गेई लावरोव को कथित तौर पर भारत के आंतरिक मामलों और भारत द्वारा रूस से की जा रही कच्चे तेल की खरीद पर गंभीर सवाल उठाते और टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। जैसे ही प्रशांत भूषण का यह पोस्ट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ, वैसे ही कूटनीतिक हलकों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलने लगीं।

विदेश मंत्रालय और रूसी दूतावास का आधिकारिक फैक्ट-चेक एवं खंडन

जैसे ही यह फर्जी वीडियो वायरल हुआ, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) की अधिकृत 'फैक्ट चेक यूनिट' ने तुरंत हरकत में आते हुए इस वीडियो का विस्तृत विश्लेषण किया और आधिकारिक खंडन जारी किया। विदेश मंत्रालय ने अपने फैक्ट-चेक अलर्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी, एडिटेड और डिजिटल रूप से निर्मित (Fabricated Audio) है। इसके साथ ही, भारत में स्थित रूसी दूतावास ने भी अपनी ओर से आधिकारिक बयान जारी कर सर्गेई लावरोव के नाम से जोड़े जा रहे इन बयानों को पूरी तरह से झूठा और खारिज करने योग्य बताया। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच अंतरराष्ट्रीय मंच पर द्विपक्षीय बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण रही थी और वीडियो में दिखाए गए दावे सरासर मनगढ़ंत और भ्रामक हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का एक्शन और दर्ज धाराओं का ब्योरा

विदेश मंत्रालय और रूसी दूतावास द्वारा वीडियो के फर्जी होने की पुष्टि किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस का मानना है कि ऐसे संवेदनशील और एडिटेड वीडियो साझा करने से न केवल मित्र देशों के साथ भारत के अंतरराष्ट्रीय व कूटनीतिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि इससे जनता के बीच भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें फैलने का भी गंभीर खतरा बना रहता है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने प्रशांत भूषण के खिलाफ एफआईआर संख्या 263/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4), धारा 353(1)(c), धारा 356, धारा 340(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66C के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है।

प्रशांत भूषण की सफाई, पोस्ट डिलीट और कानूनी पचड़े में फंसने के निहितार्थ

सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने और विदेश मंत्रालय द्वारा फर्जी वीडियो का भंडाफोड़ किए जाने के बाद प्रशांत भूषण ने अपने एक्स (X) हैंडल से उस विवादित पोस्ट को हटा लिया (Delete)। हालांकि, पोस्ट डिलीट किए जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज हो जाने से प्रशांत भूषण की कानूनी परेशानी काफी बढ़ गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फर्जी ऑडियो और वीडियो क्लिप्स के स्रोत की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह फर्जी सामग्री किसने तैयार की थी और इसे जानबूझकर भ्रामक एजेंडे के तहत फैलाया गया था या नहीं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी खबरों और डीपफेक/मॉर्क्ड वीडियो के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के सख्त होते रुख के बीच इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता से पूछताछ भी की जा सकती है।

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