सौरव दास के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में याचिका, पहचान और नागरिकता जांचने की मांग

देश के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में एक नया और अनोखा मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पत्रकार सौरव दास के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका में सौरव दास की वास्तविक पहचान, नागरिकता, माता-पिता की जानकारी और उनके पूरे बैकग्राउंड की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है। मामले की शुरुआती सुनवाई के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, संबंधित अधिकारियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर इस संदर्भ में जवाब मांगा है।
क्या हैं जनहित याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप?
मद्रास हाई कोर्ट में गणेश कुमार द्वारा दाखिल की गई इस याचिका में दावा किया गया है कि सौरव दास की पहचान और राष्ट्रीयता को लेकर कई अहम सवाल खड़े होते हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और भ्रामक टिप्पणियां करने वाले इस व्यक्ति के पिछले रिकॉर्ड और वंशानुक्रम की गहन जांच होनी चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि जांच में उनके दावों या दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य सरकारी दस्तावेजों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करने और बयानबाजी पर रोक की गुहार
याचिकाकर्ता ने केवल बैकग्राउंड जांच तक ही अपनी मांग को सीमित नहीं रखा है, बल्कि अदालत से यह भी अपील की है कि न्यायपालिका और भारत के सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों के मद्देनजर सौरव दास के सोशल मीडिया अकाउंट्स (X और इंस्टाग्राम) को ब्लॉक किया जाए। याचिका में कहा गया है कि उन्हें किसी भी सार्वजनिक या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यूडिशियरी के खिलाफ विवादास्पद और भ्रामक बयानबाजी करने से रोका जाए। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित पक्षों से छह हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सीजेपी और आशुतोष रांका की तीखी प्रतिक्रिया
हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने और इस याचिका के सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इसे उत्पीड़न की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने लिखा कि किसी व्यक्ति के काम या विचारों से असहमति होने के आधार पर उसके परिवार, नागरिकता और बैकग्राउंड को निशाना बनाना पूरी तरह से शर्मनाक है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति के खिलाफ इस प्रकार के हथकंडे कब तक अपनाए जाते रहेंगे।
क्या होगा मामले में अगला कानूनी कदम?
मद्रास हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सबकी नजरें केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और सोशल मीडिया कंपनियों के जवाब पर टिकी हुई हैं। छह सप्ताह के भीतर कोर्ट में दाखिल होने वाले जवाबों से यह स्पष्ट होगा कि क्या जांच एजेंसियां सौरव दास के दस्तावेजों और बैकग्राउंड की जांच करेंगी या अदालत इस याचिका को खारिज करेगी। फिलहाल यह मुद्दा कानूनी बहस के साथ-साथ राजनीतिक और सोशल मीडिया स्पेस में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।