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2027 में धीमी पड़ सकती है अमेरिका की ग्रोथ की स्पीड! दिग्गज ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs ने जारी की कड़ी चेतावनी, जानें इसके पीछे की 4 सबसे बड़ी वजहें

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों से जारी मजबूत आर्थिक रफ्तार और लचीलेपन पर आने वाले समय में गहरा ब्रेक लग सकता है। वैश्विक स्तर पर वित्तीय और निवेश बैंकिंग जगत की दिग्गज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने अपनी नवीनतम शोध रिपोर्ट में चेतावनी जारी की है कि वर्ष 2027 में अमेरिकी आर्थिक विकास दर (US Economic Growth) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक ऊंची बनी रहने वाली बॉन्ड यील्ड (High Bond Yields), फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियां, उपभोक्ताओं की घटती बचत और कॉर्पोरेट जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे अंधाधुंध पूंजीगत व्यय में संभावित ठहराव ऐसे प्रमुख कारण हैं जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के पहियों को सुस्त कर सकते हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की गति धीमी रखने और ट्रेजरी यील्ड के लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण आर्थिक गतिविधियों और कॉरपोरेट निवेश पर दबाव दोगुना होने की आशंका जताई गई है।

गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यद्यपि मौजूदा दौर में अमेरिका में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र मजबूत आंकड़ों का प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सतह के नीचे वित्तीय तनाव तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि विकास दर का यह धीमापन किसी गंभीर मंदी (Recession) का रूप भले न ले, लेकिन यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की औसत वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर को 2.2 प्रतिशत या उससे भी नीचे ला सकता है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सुस्ती का सीधा और नकारात्मक प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह यूरोप, चीन, एशिया और भारत सहित वैश्विक व्यापार व उभरते बाजारों की वित्तीय स्थिरता पर भी असर डाल सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर गोल्डमैन सैक्स को यह कड़ी चेतावनी क्यों जारी करनी पड़ी और किन वजहों से अमेरिकी रफ्तार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

ऊंची बॉन्ड यील्ड का गहराता दबाव: 2027 में दोगुना हो सकता है ग्रोथ पर असर

गोल्डमैन सैक्स की शोध रिपोर्ट का सबसे अहम और चिंताजनक पहलू अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) का लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर टिके रहना है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि 10-वर्षीय और लंबी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड मौजूदा ऊंचे स्तरों पर बनी रहती है या और बढ़ती है, तो इसका अमेरिकी जीडीपी ग्रोथ पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव (Drag on Growth) 2027 तक दोगुने से भी अधिक हो सकता है। अमेरिकी सरकार के बढ़ते राजकोषीय घाटे और भारी कर्ज के चलते बाजार में नए बॉन्ड्स की भारी आपूर्ति हो रही है, जिससे यील्ड लगातार चढ़ रही है।

जब बॉन्ड यील्ड ऊंची होती है, तो उसका सीधा असर वाणिज्यिक बैंकों की उधारी लागत पर पड़ता है। कॉरपोरेट कंपनियों के लिए नया कर्ज लेना, पुराने कर्ज को रोल-ओवर कराना और नए कारखाने या बुनियादी ढांचा स्थापित करना बेहद महंगा हो जाता है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि 2027 का संपूर्ण आर्थिक दृष्टिकोण इस बात पर निर्भर करेगा कि बॉन्ड यील्ड्स सामान्य स्तर पर लौटती हैं या फिर वे इसी तरह ऊंची रहकर अमेरिकी कंपनियों के पूंजीगत निवेश (Corporate Capex) का दम घोंटती रहेंगी।

ब्याज दरों का चक्र: फेड की सख्त नीतियों से सुस्त पड़ेगी निजी खपत

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नीतिगत ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखने (Higher for Longer) का फैसला अब आम नागरिकों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। गोल्डमैन सैक्स के वरिष्ठ अर्थशास्त्री पियरफ्रांसेस्को मेई (Pierfrancesco Mei) ने अपनी समीक्षा में आगाह किया है कि ऊंची ब्याज दरों का संचयी प्रभाव 2027 तक अमेरिकी उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) की वृद्धि दर में 0.5 प्रतिशत अंक तक की सीधी कटौती कर सकता है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उपभोग और आम जनता के खर्च पर आधारित है। पिछले कुछ वर्षों में जहां अमेरिकी उपभोक्ताओं ने महामारी के दौरान बची अतिरिक्त नकदी के दम पर बाजार को संभाले रखा, वहीं अब वह अतिरिक्त बचत पूरी तरह खत्म हो चुकी है। क्रेडिट कार्ड के रिकॉर्ड ब्याज दरें (22% से अधिक), ऑटो लोन और 30-वर्षीय मॉर्गेज लोन की 6.5 से 7 प्रतिशत की ऊंची दरों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की क्रय शक्ति को निचोड़ दिया है। जब आम उपभोक्ता गैर-जरूरी सामानों की खरीदारी बंद करेगा, तो खुदरा और सेवा क्षेत्र में सीधी मंदी देखने को मिलेगी।

कॉर्पोरेट मुनाफे और AI बूम की चमक पड़ने लगी है फीकी

पिछले दो वर्षों के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार (विशेषकर S&P 500 और नैस्डैक) में जो ऐतिहासिक तेजी देखी गई, उसकी मुख्य धुरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी दिग्गज टेक कंपनियों (Magnificent 7) का अंधाधुंध पूंजीगत व्यय रहा है। लेकिन गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यह बूम अब अपनी सीमा के करीब पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, S&P 500 कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में लगभग आधा योगदान केवल टेक कंपनियों के भारी एआई खर्च से आ रहा था, जिसके 2027 तक धीरे-धीरे कमजोर पड़ने और स्थिर होने के पूरे संकेत हैं।

गोल्डमैन सैक्स के रणनीतिकारों का अनुमान है कि S&P 500 कंपनियों के मुनाफे की विकास दर, जो 2026 में 36 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी, वह 2027 में तेजी से गिरकर महज 11 से 18 प्रतिशत के दायरे में सिमट सकती है। इसके अलावा, डेटा सेंटर बनाने, पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और महंगे चिप्स खरीदने के लिए जरूरी फाइनेंसिंग में अब अड़चनें आनी शुरू हो गई हैं। केवल चुनिंदा टेक शेयरों के दम पर चल रहे बाजार का नेतृत्व संकुचित हो रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से डॉट-कॉम बबल जैसी संवेदनशीलता की याद दिलाता है। यदि कॉर्पोरेट मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ता, तो अमेरिकी कंपनियों द्वारा नई नियुक्तियों पर रोक और लागत में कटौती का दौर शुरू हो जाएगा।

हाउसिंग मार्केट में ठहराव और रियल एस्टेट का गंभीर संकट

अमेरिका का रियल एस्टेट और आवास क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन वर्तमान में यह क्षेत्र 'ग्रिडलॉक' (पूर्ण ठहराव) की स्थिति का सामना कर रहा है। 30-वर्षीय फिक्स्ड होम लोन की ब्याज दरें ऐतिहासिक रूप से ऊंची बनी हुई हैं, जिसके चलते नए खरीदारों के लिए घर खरीदना पहुंच से बाहर हो गया है। दूसरी तरफ, पुराने घर मालिक जिनके पास 3 प्रतिशत की सस्ती दर वाले पुराने लोन हैं, वे अपने घरों को बेचने से कतरा रहे हैं, जिससे बाजार में मकानों की आपूर्ति ठप हो गई है।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, यदि ब्याज दरें 2027 तक अनुमान के अनुसार तेजी से नीचे नहीं आती हैं, तो कमर्शियल रियल एस्टेट (कार्यालय भवन और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स) के अरबों डॉलर के पुराने कर्ज डिफॉल्ट के जोखिम में पड़ सकते हैं। क्षेत्रीय अमेरिकी बैंकों के पास कमर्शियल प्रॉपर्टीज का भारी एक्सपोजर है, और इस सेक्टर में आने वाला कोई भी बड़ा झटका वित्तीय प्रणाली में उधारी प्रवाह को पूरी तरह बाधित कर सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर क्या होगा इसका संभावित असर?

जब दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक इंजन सुस्त पड़ता है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर लहरों की तरह फैलता है। अमेरिका में उपभोक्ता मांग कमजोर पड़ने का सीधा अर्थ यह है कि एशिया और यूरोप से होने वाले निर्यात (इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और मशीनरी) में भारी गिरावट दर्ज होगी। कच्चे तेल और कमोडिटी की वैश्विक कीमतों में मांग घटने से नरमी आ सकती है, जो आयात करने वाले देशों के लिए तो राहत की बात होगी, लेकिन वैश्विक व्यापार की रफ्तार पर विराम लगा देगी।

भारत के दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और आईटी सेवाओं का सबसे बड़ा खरीदार है। यदि अमेरिकी कॉरपोरेट जगत अपने टेक और एआई खर्च में कटौती करता है, तो भारतीय आईटी दिग्गज कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro, HCLTech) के रेवेन्यू ग्रोथ और नए प्रोजेक्ट्स हासिल करने की गति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, सकारात्मक पक्ष यह भी है कि अमेरिकी विकास दर धीमी होने पर फेडरल रिजर्व को अंततः ब्याज दरों में आक्रामक कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे वैश्विक पूंजी फिर से भारत जैसे मजबूत घरेलू विकास वाले उभरते बाजारों (Emerging Markets) की ओर रुख करेगी। गोल्डमैन सैक्स की यह समय पूर्व चेतावनी अमेरिकी नीति नियंताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि उन्हें समय रहते वित्तीय और राजकोषीय असंतुलन को दुरुस्त करना होगा ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को किसी नए आर्थिक झटके से बचाया जा सके।

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