विदेश

ढाई घंटे में 11 बार कांपी धरती: तिब्बत में 7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद एक के बाद एक लगे 10 झटके, खौफ में लोग

तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र और उससे सटे हिमालयी भूभाग में प्रकृति के भीषण प्रहार ने भारी दहशत फैला दी है। शुक्रवार की सुबह ढाई घंटे के बेहद कम अंतराल के भीतर धरती एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल 11 बार जोरदार झटकों से दहल उठी। भूकंपीय निगरानी केंद्रों के अनुसार, सुबह का सबसे पहला और विनाशकारी झटका रिक्टर पैमाने पर 7.0 की प्रचंड तीव्रता के साथ दर्ज किया गया। इस महाझटके की धमक इतनी तीव्र थी कि इसका असर सैकड़ों किलोमीटर दूर हिमालय की तलहटी और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार तक महसूस किया गया। अभी लोग इस भीषण झटके के खौफ से संभल भी नहीं पाए थे कि जमीन के भीतर लगातार आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) का सिलसिला शुरू हो गया और अगले ढाई घंटों में एक के बाद एक 10 और मध्यम से तेज तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। अचानक आई इस भूकंपीय श्रृंखला (Earthquake Swarm) के चलते लोग घरों और इमारतों से बाहर खुले मैदानों की ओर भाग खड़े हुए।

7.0 तीव्रता का मुख्य झटका: जमीन के 10 किमी नीचे था केंद्र

भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology) और वैश्विक भूगर्भीय एजेंसियों (USGS) के प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह लगभग 6:00 से 6:30 बजे के बीच आए सबसे बड़े भूकंप का केंद्र तिब्बत के कम आबादी वाले लेकिन सामरिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी इलाके में स्थित था।

  • तीव्रता (Magnitude): 7.0 रिक्टर स्केल

  • केंद्र की गहराई (Depth): जमीन से महज 10 किलोमीटर नीचे (Shallow Earthquake)

  • प्रभाव: उथली गहराई में आए इस भूकंप के कारण सतह पर ऊर्जा का उत्सर्जन अत्यधिक हिंसक रहा, जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन (Landslides) होने और पुरानी इमारतों व संपर्क मार्गों में दरारें आने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत दल सुदूर पहाड़ी गांवों में नुकसान का जायजा लेने के लिए रवाना हो चुके हैं।

ढाई घंटे में 10 बैक-टू-बैक आफ्टरशॉक्स: 4.2 से 5.8 तक मापी गई तीव्रता

मुख्य भूकंप के आने के तुरंत बाद धरती शांत नहीं हुई। भूगर्भीय तनाव के पुनर्संतुलन के चलते अगले 150 मिनटों (ढाई घंटे) तक जमीन लगातार हिलती रही। इस दौरान दर्ज किए गए 10 अन्य झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.2 से लेकर 5.8 के बीच मापी गई:

  1. पहला बड़ा झटका: मुख्य कंपन के ठीक 12 मिनट बाद (तीव्रता 5.8)

  2. दूसरा व तीसरा झटका: 15 मिनट के अंतराल पर (तीव्रता 5.2 और 4.9)

  3. चौथे से सातवें झटके: अगले एक घंटे के दौरान लगातार 4.5 से 4.8 तीव्रता के मध्य झटके दर्ज

  4. आठवें से दसवें झटके: धीमी गति के बावजूद 4.2 से 4.6 की तीव्रता वाले लगातार कंपन

बार-बार आ रहे इन आफ्टरशॉक्स के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी मुश्किलें पेश आ रही हैं, क्योंकि पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों और पहाड़ी ढलानों के ढहने का खतरा लगातार बना हुआ है।

हिमालयी फॉल्ट लाइन पर क्यों मच रही है इतनी बड़ी खलबली?

भूवैज्ञानिकों और सिस्मोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, तिब्बत और समूचा हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय और खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों (Seismic Zone V) में शामिल है। इस पूरे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना बेहद संवेदनशील है:

  • टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर: भारतीय प्लेट (Indian Plate) लगातार उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate) की तरफ लगभग 4 से 5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से खिसक रही है। इन दोनों विशाल चट्टानी प्लेटों के आपस में टकराने से हिमालय के नीचे भारी मात्रा में भूगर्भीय ऊर्जा (Stress Energy) जमा होती रहती है।

  • तनाव रिलीज होने का परिणाम: जब यह संचित ऊर्जा चट्टानों की सहनशीलता से अधिक हो जाती है, तो वे अचानक टूटती या खिसकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप 7 या उससे अधिक तीव्रता के बड़े भूकंप आते हैं।

  • उथले केंद्र का जोखिम: जब भूकंप का केंद्र जमीन से 10 से 15 किमी की उथली गहराई पर होता है, तो सतह पर ऊर्जा का बिखराव बहुत तेज होता है, जिससे व्यापक झटके महसूस होते हैं और आफ्टरशॉक्स की संख्या भी बढ़ जाती है।

क्या भारत और पड़ोसी देशों के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखा असर?

तिब्बत में आए 7.0 तीव्रता के इस भारी भूकंप के झटके भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख की सीमा से लगे इलाकों और नेपाल के उत्तरी भागों तक महसूस किए गए। हालांकि, सुदूर और उथली पर्वतमालाओं के बीच ऊर्जा का अधिकांश हिस्सा तिब्बती पठार पर ही केंद्रित रहा, जिससे भारतीय सीमा के भीतर किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। फिर भी, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि सीमा पार नदियों के प्रवाह में किसी भूस्खलन के कारण बनने वाली झीलों या बांधों की स्थिति पर नजर रखी जा सके।

लगातार आफ्टरशॉक्स के बीच प्रशासन ने जारी किए सुरक्षा प्रोटोकॉल

स्थानीय नागरिक सुरक्षा एजेंसियों ने भूकंप प्रभावित इलाकों में लोगों को फिलहाल पक्के और बहुमंजिला मकानों के भीतर न लौटने की सख्त हिदायत दी है:

  • सुरक्षित स्थानों पर शरण: नागरिकों से कहा गया है कि वे खुले मैदानों, पार्कों और चौड़ी सड़कों पर ही रहें, जब तक कि आफ्टरशॉक्स की आवृत्ति पूरी तरह थम न जाए।

  • इलेक्ट्रिक व गैस लाइनें बंद रखें: भूकंप के बाद गैस रिसाव या बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, इसलिए मुख्य मीटर और एलपीजी कनेक्शन बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • पहाड़ी ढलानों से दूरी: आफ्टरशॉक्स के कारण कमजोर चट्टानें कभी भी नीचे गिर सकती हैं, इसलिए राजमार्गों और पहाड़ी रास्तों पर गैर-जरूरी आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

Back to top button