विदेश

अरुणाचल पर जमीन हड़पने की नापाक साजिश और ग्लोबल टाइम्स का झूठा प्रोपेगैंडा

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर तनाव के बीच ड्रैगन का एक बेहद शातिर और दोहरा चरित्र एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। एक तरफ जहां चीनी पीपुल्स लिबरनेशन आर्मी यानी पीएलए अरुणाचल प्रदेश से सटी भारतीय सीमा के पास चुपचाप अवैध बस्तियां बसाने, फॉरवर्ड मिलिट्री बेस तैयार करने और सामरिक बुनियादी ढांचे का जाल बिछाकर जमीन हड़पने के नापाक खेल में जुटी है, वहीं दूसरी ओर चीन का सरकारी और प्रोपेगैंडा अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' दुनिया के सामने शांति का मसीहा बनने का ढोंग रच रहा है। चीनी मीडिया के इन पाखंडी लेखों और संपादकीय का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखों में धूल झोंकना और अपनी विस्तारवादी आक्रामकता पर पर्दा डालना है। लेकिन भारतीय रक्षा मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक विशेषज्ञों के लिए चीन की यह चाल अब कोई नई बात नहीं है, क्योंकि वे ड्रैगन की कथनी और करनी के इस बड़े अंतर को भली-भांति समझते हैं और हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

अरुणाचल सीमा पर चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' नीति और गांवों को बसाने का खौफनाक खेल

चीन की हमेशा से यह फितरत रही है कि वह बिना कोई बड़ा युद्ध लड़े धीरे-धीरे पड़ोसी देशों की जमीन पर अतिक्रमण करता है, जिसे कूटनीति की भाषा में 'सलामी स्लाइसिंग' कहा जाता है। अरुणाचल प्रदेश के सीमाई इलाकों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान चीन ने जिस बड़े पैमाने पर तिब्बत की तरफ से 628 सामरिक गांवों का निर्माण किया है और उनमें नागरिकों को लाकर बसाया है, वह सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा है। इन तथाकथित 'वेल-ऑफ विलेजेस' का इस्तेमाल भविष्य में फॉरवर्ड मिलिट्री शेल्टर और रसद डिपो के रूप में किए जाने की पूरी आशंका है। एक तरफ चीन सरहद के बिल्कुल मुहाने पर अपनी जनसांख्यिकी और भौगोलिक स्थिति को बदलने के लिए इस प्रकार के अवैध निर्माण कर रहा है, और दूसरी तरफ उसके सरकारी अखबारों में यह राग अलापा जा रहा है कि बीजिंग पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आर्थिक सहयोग चाहता है। ड्रैगन का यह पाखंड उसकी दोहरी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

ग्लोबल टाइम्स के जरिए वैश्विक बिरादरी को गुमराह करने का मनोवैज्ञानिक प्रोपेगैंडा

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य पत्र ग्लोबल टाइम्स का यह नया ढोंग वास्तव में एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक युद्ध नीति का हिस्सा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की आक्रामक नीतियों, ताइवान के मुद्दे या भारत के साथ सीमा विवाद पर चौतरफा थू-थू होती है, तब चीनी प्रोपेगैंडा मशीनरी सक्रिय हो जाती है। अखबारों में ऐसे आलेख छापे जाते हैं जिनमें यह साबित करने की कोशिश की जाती है कि चीन क्षेत्रीय स्थिरता का सबसे बड़ा समर्थक है और एशिया में शांति बनाए रखना चाहता है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। एलएसी के करीब राडार स्टेशन, उन्नत संचार नेटवर्क, सैनिक ठिकाने और पक्की सड़कें बनाने वाला देश अचानक शांतिदूत होने का नाटक करे, तो दुनिया का कोई भी समझदार देश इस पर भरोसा नहीं कर सकता। भारत ने हमेशा दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि जब तक सीमा पर पूरी तरह से शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक इस तरह के झूठे मीडिया स्टंट और प्रोपेगैंडा का कोई मतलब नहीं है।

भारत की अटूट सामरिक तैयारी और पूर्वोत्तर सीमा पर अभेद्य सुरक्षा का चक्रव्यूह

आज का आधुनिक और सशक्त भारत चीन के इस मनोवैज्ञानिक और मीडिया छलावे में आने वाला नहीं है। नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमताओं, बुनियादी ढांचे और रणनीतिक तैयारियों को इतना मजबूत कर लिया है कि किसी भी चीनी दुस्साहस का तुरंत और मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ ने दुर्गम पहाड़ियों, घाटियों और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में ऑल-वेदर रोड्स, सामरिक पुलों और सुरंगों का जाल बिछा दिया है। अब भारतीय सेना के जवान और टैंक किसी भी आपात स्थिति में बहुत कम समय में फॉरवर्ड लोकेशंस पर पहुंच सकते हैं। भारत की इस आक्रामक और सतर्क रक्षा नीति ने चीन के उन तमाम सपनों पर पानी फेर दिया है जिनके सहारे वह प्रोपेगैंडा के बल पर भारतीय जमीन पर दबाव बनाने की फिराक में रहता है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि देश की एक इंच जमीन पर भी किसी बाहरी ताक़त को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।

क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की कूटनीतिक चुनौतियों का कड़ा यथार्थ

अरुणाचल सीमा पर चीन का यह दोहरा खेल आने वाले समय में दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर दुनियाभर के विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है। एक तरफ चीनी अधिकारी और मीडिया शांति की झूठी कसमें खाते हैं, और दूसरी तरफ उनके सैन्य कमांडर सीमा पर नए मोर्चे खोलने की साजिश रचते हैं। भारत ने अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति के दम पर यह साबित कर दिया है कि वह कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर ड्रैगन को हर कदम पर कड़ी टक्कर देने में पूरी तरह सक्षम है। ग्लोबल टाइम्स के इस बड़े दिल दिखाने के ढोंग को भारत के जागरूक नागरिकों और नीति निर्माताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है। यह स्पष्ट हो चुका है कि जब तक चीन अपनी विस्तारवादी मानसिकता और जमीन हड़पने की पुरानी आदतों को नहीं छोड़ता, तब तक उसके किसी भी प्रोपेगैंडा नाटक पर कोई विश्वास नहीं करेगा और भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता से अडिग रहेगा।

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