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बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात ‘अर्नब’ ने पलटा मौसम का पूरा मिजाज

देश के कई बड़े राज्यों में इन दिनों मौसम ने अचानक एक बेहद खतरनाक और नाटकीय यू-टर्न ले लिया है। बंगाल की खाड़ी के मध्य-पश्चिम हिस्से में जन्मा शक्तिशाली चक्रवाती तूफान 'अर्नब' (Cyclone Arnab) आखिरकार भारतीय तटों से टकरा चुका है, जिसके चलते पूर्वी और दक्षिण भारत के कई इलाकों में कुदरत का कहर साफ तौर पर देखा जा रहा है। इस भयंकर चक्रवात के प्रभाव से आसमान में काले बादलों का डेरा है और समंदर की उठती ऊंची-ऊंची डरावनी लहरें हर किसी को सहमा रही हैं। मौसम विभाग यानी आईएमडी (IMD) द्वारा लगातार जारी की जा रही चेतावनियों के बीच जमीन पर इस तूफान का असर दिखने लगा है, जहां तेज हवाओं के थपेड़े अपने रास्ते में आने वाली हर रुकावट को नेस्तनाबूद करने पर उतारू नजर आ रहे हैं।

तटीय राज्यों में तांडव: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आंधी-तूफान का जबरदस्त प्रहार

चक्रवात 'अर्नब' के मुहाने पर सबसे पहले दक्षिण-पूर्वी तटीय इलाके आए, जहां इसने एक बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में लैंडफॉल की प्रक्रिया पूरी की। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, काकीनाडा, मसूलीपट्टनम और ओडिशा के कई जिलों में इस तूफान की वजह से 120 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज और डरावनी हवाएं चलीं। तटीय पट्टियों पर सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे तेज हवा के दबाव से विशालकाय और पुराने पेड़ उखड़कर सड़कों पर आ गिरे हैं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। प्रशासन द्वारा साझा की गई शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गई हैं और निचले इलाकों में समंदर का पानी घुस जाने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इन इलाकों में सुरक्षा के मद्देनजर एनडीआरएफ (NDRF) और राज्य आपदा बलों की टीमों को तैनात किया गया है जो युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।

उखड़े हुए पेड़ और जलमग्न सड़कें: तस्वीरों में कैद तबाही का खौफनाक मंजर

सामने आई तस्वीरों और ग्राउंड जीरो की रिपोर्टों पर अगर नजर डालें तो चक्रवात 'अर्नब' की तबाही का दायरा काफी बड़ा नजर आता है। पहली और दूसरी तस्वीरों में आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों पर ऊंची उठती हुई सफेद डरावनी लहरें दिखाई दे रही हैं, जो चेतावनी दे रही हैं कि समंदर के करीब जाना कितना घातक साबित हो सकता है। तीसरी और चौथी तस्वीर में विशाखापत्तनम और उसके आसपास के हाइवे की हैं, जहां सड़क के बीचों-बीच भारी-भरकम पेड़ टूटे पड़े हैं और बिजली के खंभे धराशायी हो चुके हैं। पांचवीं और छठी तस्वीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच पानी से लबालब भरी सड़कें और गलियां नजर आ रही हैं, जहां आम जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ चुका है। सातवीं और आठवीं तस्वीरों में प्रशासन द्वारा निचले इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित शेल्टर होम और राहत शिविरों में पहुंचाने की जद्दोजहद साफ देखी जा सकती है, जहां बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित शिफ्ट किया गया है। नौवीं और दसवीं तस्वीरें पश्चिम बंगाल के दीघा बीच और ओडिशा के मयूरभंज की हैं, जहां चक्रवात के दूरगामी प्रभाव के रूप में तेज आंधी और बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सिर्फ तटीय राज्य ही नहीं, देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचा बादलों का डेरा

इस चक्रवाती तूफान का असर सिर्फ समुद्र के तटीय इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभाव से देश के कई अन्य राज्यों के मौसम ने भी करवट ले ली है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के तमाम जिलों में आसमान में बादल छाने और झमाझम बारिश होने की गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 'अर्नब' के आगे बढ़ने के साथ ही उत्तर भारत के कई हिस्सों में ठंडी हवाओं का दौर तेज होगा और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। जिन इलाकों में पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से लोग परेशान थे, वहां इस चक्रवात के कारण हुई मौसमी हलचल से अचानक ठंडक महसूस होने लगी है, हालांकि कई जगहों पर लगातार हो रही बारिश ने किसानों और आम नागरिकों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

प्रशासन की कड़ी चौकसी और आम जनता के लिए जरूरी एहतियाती निर्देश

इस विकराल प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही हैं। प्रभावित होने वाले संभावित जिलों में स्कूल और कॉलेज एहतियातन बंद कर दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। मछुआरों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले कुछ दिनों तक बंगाल की खाड़ी और समुद्र के आस-पास भूलकर भी न जाएं क्योंकि वहां की स्थितियां बेहद खतरनाक बनी हुई हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी बेहद जरूरी काम के अपने घरों से बाहर न निकलें और प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। प्रकृति के इस भयंकर रूप ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मौसम कब कौन सा नया और विनाशकारी रूप ले ले, इसका अनुमान लगाना बेहद कठिन है, लेकिन समय रहते बरती गई सावधानी ही इस तरह के खतरों से जीवन की रक्षा कर सकती है।

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