Car Hacking Risk: चलती कार का ब्रेक और स्टीयरिंग भी हो सकते हैं हैक! साइबर हमले के खतरे में इंटरनेट से जुड़ी ‘कनेक्टेड कारें’, रिसर्च में बड़ा खुलासा

आज के दौर में कारें सिर्फ इंजन, पहियों, गियर और पारंपरिक ब्रेक के सहारे चलने वाला यांत्रिक साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि वे पहियों पर दौड़ते सुपर कंप्यूटर में तब्दील हो चुकी हैं। आधुनिक गाड़ियों में जीपीएस नेविगेशन, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, इंटरनेट कनेक्टिविटी (e-SIM), ब्लूटूथ, वाई-फाई, मोबाइल रिमोट ऐप और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। ये तकनीकी खूबियां सफर को बेहद सुगम, मनोरंजक और आरामदायक तो बनाती हैं, लेकिन साथ ही वे साइबर अपराधियों (हैकरों) के लिए भी खतरे का नया दरवाजा खोल रही हैं। हाल ही में साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कनेक्टेड कारों के सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम में मौजूद गंभीर सुरक्षा खामियों (Security Vulnerabilities) का फायदा उठाकर हैकर्स दूर बैठकर भी चलती कार के ब्रेक और स्टीयरिंग जैसे संवेदनशील सिस्टम में दखल दे सकते हैं।
रिसर्च में खुलासा: 400 से अधिक सॉफ्टवेयर खामियां, 45% उच्च खतरे की श्रेणी में
एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर क्वालिटी जर्नल में प्रकाशित ताजा शोध रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2022 से सितंबर 2024 के बीच आधुनिक कारों से जुड़े डिजिटल इकोसिस्टम में कुल 413 सॉफ्टवेयर सुरक्षा खामियों की पहचान की गई। इनमें से लगभग 45 फीसदी खामियां 'हाई-सिवेरिटी' (अत्यधिक गंभीर) श्रेणी की पाई गईं।
अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि कारों के सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा केवल गाड़ी के हार्डवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहरी डिजिटल प्लेटफॉर्म इसका सबसे बड़ा जरिया बन रहे हैं:
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36.2% खामियां: कार निर्माता कंपनियों के बाहरी मोबाइल ऐप्लिकेशंस (Connected Apps), वेब सर्विसेज और क्लाउड सर्वर से जुड़ी थीं।
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23.5% खामियां: इन-व्हीकल चिप सिस्टम, एम्बेडेड कंट्रोलर्स और ऑन-बोर्ड कंप्यूटिंग मॉड्यूल में दर्ज की गईं।
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ओपन-सोर्स कोड: रिसर्च में पाया गया कि ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर लाइब्रेरी में सैकड़ों वल्नरेबिलिटीज मौजूद थीं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स गाड़ी के आंतरिक नेटवर्क तक पहुंच बना सकते हैं।
इंफोटेनमेंट स्क्रीन से सीधे ब्रेक और स्टीयरिंग तक कैसे पहुंच सकते हैं हैकर्स?
किसी भी आधुनिक कार के आंतरिक संचालन को इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) और 'कैन बस' (CAN Bus – Controller Area Network) नियंत्रित करती है। कार में 50 से 100 से अधिक छोटे कंप्यूटर (ECUs) लगे होते हैं, जो इंजन, ऑटोमैटिक गियरबॉक्स, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग और एयरबैग्स को नियंत्रित करते हैं।
समस्या तब पैदा होती है जब कार निर्माता मनोरंजन और कनेक्टिविटी वाले सिस्टम (जैसे इंफोटेनमेंट और ब्लूटूथ) तथा सुरक्षा-संवेदनशील प्रणालियों (ब्रेक और स्टीयरिंग) के नेटवर्क के बीच पर्याप्त डिजिटल अलगाव (Air-Gapping या Firewall Isolation) नहीं रखते। यदि हैकर किसी कमजोर थर्ड-पार्टी मोबाइल ऐप, ब्लूटूथ पोर्ट, टेलीमैटिक्स डिवाइस या वायरलेस वाई-फाई सिग्नल के जरिए इंफोटेनमेंट सिस्टम में सेंध लगा लेता है, तो कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में वह आंतरिक 'कैन बस' नेटवर्क पर फर्जी डिजिटल कमांड भेज सकता है। इसके परिणामस्वरूप:
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तेज रफ्तार में कार के ब्रेक को अचानक निष्क्रिय (Disable) किया जा सकता है या आपातकालीन ब्रेक लगाया जा सकता है।
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इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग के एलाइनमेंट और दिशा में अचानक अवांछित बदलाव किया जा सकता है।
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चलती गाड़ी के इंजन को रिमोटली बंद (Engine Shutdown) किया जा सकता है।
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दरवाजों के ऑटोमैटिक लॉक को खोलना या बंद करना और हेडलाइट्स/टर्न इंडिकेटर्स को बाधित करना संभव हो जाता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं कार हैकिंग के रोंगटे खड़े करने वाले मामले
कारों की रिमोट हैकिंग केवल कोई काल्पनिक थ्योरी नहीं है, बल्कि अतीत में इसके व्यावहारिक प्रमाण सामने आ चुके हैं:
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जीप चेरोकी हैक (Jeep Cherokee Incident): साइबर शोधकर्ता चार्ली मिलर और क्रिस वालसेक ने इंटरनेट-कनेक्टेड सिस्टम की खामी का इस्तेमाल कर लगभग 15 किलोमीटर दूर बैठकर एक चलती जीप चेरोकी का इंजन बंद कर दिया था और उसके ब्रेक फेल कर दिए थे। इस खुलासे के बाद ऑटोमोबाइल कंपनी फिएट क्रिसलर को अमेरिका में करीब 14 लाख वाहनों को सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए वापस बुलाना (Recall) पड़ा था।
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OBD-II डोंगल और ट्रैकिंग डिवाइस हैक: बीमा कंपनियों और फ्लीट मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले बाहरी डायग्नोस्टिक डोंगल (OBD Port Devices) के जरिए महज एक एसएमएस (SMS) भेजकर गाड़ी के वाइपर चालू करने और ब्रेक लगाने का परीक्षण सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सार्वजनिक किया जा चुका है।
किन कारों और फीचर्स पर है सबसे ज्यादा जोखिम?
बाजार में मौजूद वे सभी गाड़ियां साइबर हमलों के संभावित दायरे में आती हैं जिनमें निम्नलिखित फीचर्स मौजूद हैं:
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सक्रिय इंटरनेट कनेक्टिविटी (Connected Car Tech): वे गाड़ियां जिनमें फैक्ट्री-फिटेड ई-सिम (eSIM) लगा होता है और जो लगातार कंपनी के क्लाउड सर्वर से जुड़ी रहती हैं।
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रिमोट ऐप कंट्रोल: जिन गाड़ियों को मोबाइल फोन से अनलॉक किया जा सकता है, जिनका एसी मोबाइल से स्टार्ट होता है या जिनकी लोकेशन मोबाइल पर ट्रैक होती है।
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लेवल-2 ADAS फीचर्स: लेन-कीप असिस्ट, ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग और अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल वाले वाहन पूरी तरह सेंसर, रडार और सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम पर निर्भर होते हैं।
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थर्ड-पार्टी इलेक्ट्रॉनिक एसेसरीज: गैर-प्रमाणित जीपीएस ट्रैकर्स, सस्ते डैशकैम या ओबीडी-पोर्ट में लगे थर्ड-पार्टी गैजेट्स कार के सिस्टम में सबसे कमजोर कड़ी साबित होते हैं।
कार मालिक कैसे सुरक्षित रखें अपनी स्मार्ट गाड़ी: जरूरी सावधानियां
सड़क पर सुरक्षा बनाए रखने और अपनी कार को साइबर हमलों से बचाने के लिए वाहन चालकों को कुछ बुनियादी सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए:
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सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर अपडेट तुरंत इंस्टॉल करें: जब भी कार कंपनी या डीलरशिप की तरफ से इंफोटेनमेंट सिस्टम या टेलीमैटिक्स का ओवर-द-एयर (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट आए, तो उसे टालें नहीं, तुरंत अपडेट करें। ये अपडेट ज्ञात बग्स और सुरक्षा खामियों को पैच करते हैं।
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मजबूत पासवर्ड और 2FA का उपयोग: अपनी कनेक्टेड कार के आधिकारिक मोबाइल ऐप के लिए एक मजबूत और अनूठा पासवर्ड रखें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें।
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अविश्वसनीय थर्ड-पार्टी डिवाइस से बचें: कार के ओबीडी (OBD-II) पोर्ट में किसी भी सस्ते या अनवेरिफाइड आफ्टर-मार्केट ट्रैकर या इंश्योरेंस डोंगल को लगाने से बचें।
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अज्ञात ब्लूटूथ और वाई-फाई नेटवर्क: सार्वजनिक या असुरक्षित वाई-फाई नेटवर्क से कार के इंफोटेनमेंट को कनेक्ट न करें और न ही किसी अनजान व्यक्ति का फोन या यूएसबी ड्राइव कार के मुख्य सिस्टम में प्लग करें।
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कंपनी के रिकॉल नोटिस पर तुरंत ध्यान दें: यदि वाहन निर्माता किसी तकनीकी या साइबर सुरक्षा संबंधी खामी के चलते गाड़ी को रिकॉल करता है, तो तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर जाकर जांच कराएं।