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फ्लाइट टिकट बुकिंग में अब नहीं छिपेंगे हिडन चार्ज, सरकार रखेगी किराए पर नजर; भारतीय वायुयान नियम 2026 की अधिसूचना जारी

हवाई सफर करने वाले करोड़ों मुसाफिरों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता है कि जब कोई यात्री ऑनलाइन टिकट बुक करता है, तो शुरुआत में स्क्रीन पर दिखने वाला किराया पेमेंट पेज तक पहुंचते-पहुंचते काफी बढ़ जाता है। सीट चयन, मील, कन्वीनियंस फीस और अन्य सेवाओं के नाम पर छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिए जाते हैं। यात्रियों की इन्हीं शिकायतों और एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम कसने के लिए नागर विमानन मंत्रालय ने नए 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' (Bharatiya Vayuyan Niyam, 2026) को आधिकारिक गजट में अधिसूचित कर दिया है। इस नए नियामक ढांचे के लागू होने के बाद एयरलाइंस टिकट बुकिंग के दौरान किसी भी तरह का हिडन चार्ज नहीं छिपा सकेंगी। नए नियमों का मकसद हवाई किराए में पूरी पारदर्शिता लाना और यात्रियों को अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचाना है।

टिकट के हर एक पैसे का देना होगा पूरा ब्योरा

नए विमानन नियमों के अनुसार, एयरलाइंस और ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर्स (OTA) को बुकिंग के पहले चरण से लेकर अंतिम टिकट जारी होने तक कुल देय राशि और उसके सभी घटकों को पूरी तरह स्पष्ट करना अनिवार्य होगा। एयरलाइंस को बेस फेयर (मूल किराया), सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स, एयरपोर्ट फीस (जैसे UDF और PSF), कैंसिलेशन चार्ज और रिफंड से जुड़ी शर्तों का अलग-अलग और साफ ब्योरा दिखाना होगा। नियम यह भी तय करते हैं कि टैक्स (जो सरकार के खाते में जाता है) और फीस (जो सेवा प्रदाता को दी जाती है) के बीच कोई घालमेल न हो। इसके साथ ही, ऑटोमैटिक प्री-चेक बॉक्स के जरिए यात्रियों पर जबरन अतिरिक्त सेवाएं थोपने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यात्री जिस सेवा को खुद अपनी मर्जी से चुनेंगे, केवल उसी का शुल्क बिल में जोड़ा जा सकेगा।

असाधारण हालात में मनमाने किराए पर सीधा हस्तक्षेप करेगी सरकार

भारत में 1994 से एयरलाइन टिकटों की कीमतें बाजार आधारित व्यवस्था (डी-रेग्युलेटेड सिस्टम) के तहत तय होती रही हैं, जहां मांग बढ़ने पर एयरलाइंस अपनी मनमर्जी से टिकटों के दाम कई गुना बढ़ा देती हैं। त्योहारों, प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध या किसी अप्रत्याशित संकट के दौरान अचानक सर्ज प्राइसिंग कर यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। नए नियमों के नियम 192(6) के तहत केंद्र सरकार ने अपने पास यह वैधानिक अधिकार सुरक्षित रखा है कि असाधारण परिस्थितियों और जनहित की स्थिति में वह एयरलाइंस के किराए में सीधा हस्तक्षेप कर सकेगी। यदि किसी आपातकाल या विशेष मार्ग पर एयरलाइंस अनुचित रूप से अत्यधिक किराया वसूलती पाई जाती हैं, तो सरकार लिखित निर्देश जारी कर किराए की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी और एयरलाइंस को उन आदेशों का पालन करना अनिवार्य होगा।

डीजीसीए को नियमित रूप से सौंपना होगा टैरिफ का डेटा

नए नियमों के तहत सभी शेड्यूल्ड डोमेस्टिक एयरलाइंस को अपना पूरा टैरिफ स्ट्रक्चर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के समक्ष निर्धारित प्रारूप और तय समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत करना होगा। एयरलाइंस को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स पर भी इन दरों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा। डीजीसीए नियमित रूप से घरेलू रूटों पर वसूले जा रहे किरायों की रियल-टाइम निगरानी करेगा। इससे न केवल एयरलाइंस के बीच अवांछित एकाधिकार या कार्टेलाइजेशन की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से उड़ान भरने वाले आम मुसाफिरों को भी वाजिब दामों पर पारदर्शी टिकट मिलने की गारंटी सुनिश्चित होगी।

1937 के पुराने नियमों की जगह लेगा नया विमानन ढांचा

यह नया नियामक तंत्र औपनिवेशिक दौर के 89 साल पुराने 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' की जगह ले रहा है। संसद द्वारा पारित भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के आधार पर तैयार किए गए ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से पूरी तरह जमीन पर प्रभावी हो जाएंगे। विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत के एविएशन सेक्टर को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाएगा। एयरलाइंस के पास व्यावसायिक स्वतंत्रता तो बनी रहेगी, लेकिन यात्रियों के साथ किसी भी प्रकार का छिपा हुआ खेल खेलने और संकट के समय मनमाना किराया वसूलने की छूट अब पूरी तरह खत्म होने जा रही है।

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