धनतेरस पर 13 दीपक घर में कहां-कहां जलाएं, जानें यम का दिया जलाने की सही विधि

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पवित्र त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर धन के देवता कुबेर, आरोग्य के दाता भगवान धन्वंतरि और धन-धान्य की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हालांकि, अधिकांश लोग धनतेरस को केवल नई खरीदारी और धन समृद्धि के पर्व के रूप में ही जानते हैं, लेकिन इस पावन तिथि पर दीपदान का भी एक अत्यंत दुर्लभ और महान आध्यात्मिक महत्व है। धनतेरस की शाम को यमराज के नाम से जलाया जाने वाला 'यम दीपक' परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है और रोगों व कष्टों का नाश करता है। शास्त्रों में धनतेरस की रात कुल 13 दीपक जलाने का विधान बताया गया है। यदि आप भी इस धनतेरस अपने घर में सुख-शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद चाहते हैं, तो जानें कि ये 13 दीपक घर में किन-किन स्थानों पर जलाए जाते हैं और यम का दीया जलाने की सही विधि, समय, नियम तथा दिशा क्या है।
#1 यम दीपक जलाने का धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि धनतेरस की शाम को प्रदोष काल में जलाया जाने वाला मुख्य दीपक 'यम दीपक' कहलाता है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने से व्यक्ति और उसके परिवार को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार यमदूतों ने यमराज से पूछा कि क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे मनुष्यों को अकाल मृत्यु और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिल सके? तब यमराज ने स्वयं बताया था कि जो मनुष्य कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) की संध्या को मेरे नाम से दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपदान करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय कभी नहीं सताएगा। इसी मान्यता के चलते सदियों से धनतेरस की रात यम के नाम का मुख्य चौमुखा दिया जलाने की परंपरा चली आ रही है।
#1 यम का दीया जलाने की सही विधि, नियम और दिशा
यम का दीपक जलाते समय कुछ विशेष धार्मिक नियमों और परंपराओं का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है ताकि इसका पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो सके:
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दीपक और तेल का चयन: यम का दीपक हमेशा आटे का चौमुखा (चार बत्तियों वाला) दीपक बनाकर जलाना चाहिए। इसमें सरसों का तेल या तिल का तेल भरा जाता है।
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दीपक जलाने की दिशा: यमराज को दक्षिण दिशा का स्वामी माना गया है। इसलिए यम का दीपक जलाकर हमेशा घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है।
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दीपक जलाने का सही समय: यम दीपक हमेशा घर के सभी सदस्यों के सोने से ठीक पहले या प्रदोष काल बीत जाने के बाद (देर शाम) जलाया जाता है।
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सावधानी और नियम: यम दीपक जलाकर बाहर रखने के बाद परिवार का कोई भी सदस्य उसे मुड़कर न देखे। दीपक रखने के बाद सीधे घर के अंदर आ जाएं और अपने हाथ-पैर धो लें। इस दीपक को घर के भीतर कभी न लाएं और न ही इसे घर के अंदर स्थापित करें।
#1 धनतेरस की रात घर में कहां-कहां जलाएं 13 दीपक, जानें हर एक स्थान का महत्व
हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, धनतेरस की रात घर में 13 दीपक जलाने से जीवन के 13 प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और 13 अलग-अलग देव शक्तियों का आशीर्वाद मिलता है। जानिए इन 13 दीपकों को घर में रखने के स्थान और उनका महत्व:
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पहला दीपक (यम दीपक): यह आटे का चौमुखा दीपक होता है, जिसे सरसों के तेल के साथ घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। यह अकाल मृत्यु और भय से मुक्ति दिलाता है।
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दूसरा दीपक (पूजा घर): घर के मंदिर या पूजा स्थल में देसी घी का दीपक जलाएं। यह मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर को समर्पित होता है, जिससे घर में अखंड लक्ष्मी का वास रहता है।
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तीसरा दीपक (मुख्य द्वार): घर के मुख्य प्रवेश द्वार (मेन गेट) पर चौखट के पास जलाएं ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सके।
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चौथा दीपक (तुलसी जी के पास): माता तुलसी के पौधे के नीचे देसी घी का दीपक जलाएं। इससे पारिवारिक जीवन में मिठास और खुशहाली आती है।
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पांचवां दीपक (घर की छत/मुंडेर): घर की छत पर या मुंडेर पर जलाएं, जो घर के सुरक्षा चक्र का प्रतीक माना जाता है।
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छठा दीपक (पीपल के पेड़ के नीचे): यदि आसपास पीपल का वृक्ष हो तो वहां तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष और शनि दोष शांत होते हैं।
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सातवां दीपक (पास के मंदिर में): अपने घर के नजदीक स्थित किसी भी देव मंदिर में जाकर जलाएं। इससे ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है।
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आठवां दीपक (कूड़ेदान के पास): घर के बाहर जहां कचरा या कूड़ा रखा जाता है, वहां एक दीपक जलाएं। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है।
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नौवां दीपक (बाथरूम/शौचालय के बाहर): घर के शौचालय या बाथरूम के बाहर एक दीपक रखें ताकि वास्तुकला संबंधी नकारात्मक प्रभाव खत्म हो सकें।
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दसवां दीपक (घर की खिड़की/बालकनी): घर की मुख्य खिड़की या बालकनी में जलाएं, जिससे वातावरण शुद्ध और ऊर्जावान बना रहे।
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ग्यारहवां दीपक (पानी के स्थान पर): घर में जहां पीने का पानी रखा जाता है (जैसे मटका या नल के पास), वहां जल देवता के नाम का दीपक जलाएं। इससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
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बारहवां दीपक (तिजोरी या अलमारी के पास): जहां आप अपना धन, आभूषण या कीमती सामान रखते हैं, वहां दीपक जलाएं। इससे धन में बरकत होती है।
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तेरहवां दीपक (घर के आंगन/चौराहे पर): घर के मध्य भाग (आंगन) या घर के बाहर पास के चौराहे पर रखें, जिससे जीवन में प्रगति के मार्ग खुलते हैं।
#1 धनतेरस दीपदान से घर में आएगी सुख, शांति और अखंड समृद्धि
धनतेरस पर यमराज और मां लक्ष्मी के निमित्त किए जाने वाले इस 13 दीपकों के दान से न केवल घर का वास्तु दोष दूर होता है, बल्कि परिवार के सदस्यों पर मंडरा रहे अनहोनी के बादल भी छट जाते हैं। सही विधि, एकाग्र मन और पूरी श्रद्धा के साथ किया गया दीपदान आपके जीवन में आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि के नए द्वार खोलता है। इस धनतेरस नियमों का पालन करते हुए दीपदान करें और भगवान धन्वंतरि व मां लक्ष्मी का असीम आशीर्वाद प्राप्त करें।