अगर चलने में हो रहा है दर्द तो ये 5 छिपे हुए कारण बढ़ा रहे हैं आपकी परेशानी

जब भी पैरों में असहनीय दर्द या चलने में दिक्कत महसूस होती है, तो सबसे पहले हमारा और समाज का ध्यान महिलाओं की हाई हील या फैशनेबल फुटवियर की तरफ जाता है। आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि हील्स पहनने की वजह से ही पैरों की उंगलियों, टखनों या एड़ियों में दर्द हो रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह धारणा हमेशा सही नहीं होती? कई बार महिलाएं हील्स पहनना पूरी तरह छोड़ देती हैं या पुरुष भी इस समस्या से जूझते हैं, बावजूद इसके उनके पैरों का दर्द कम होने का नाम नहीं लेता। यदि आपको भी बिना किसी भारी हील के रोजाना चलने-फिरने में पैरों में जकड़न, तलवों में चुभन या दर्द का अहसास होता है, तो इसके पीछे कोई अन्य अंदरूनी या बाहरी कारण जिम्मेदार हो सकता है। हमारे शरीर का पूरा भार हमारे पैरों पर टिका होता है, और जब हमारी जीवनशैली, खान-पान या शारीरिक बनावट में कुछ गड़बड़ी आती है, तो पैर सबसे पहले जवाब देने लगते हैं। आइए आज विस्तार से जानते हैं उन 5 प्रमुख और छिपे हुए कारणों के बारे में जो हाई हील न पहनने के बावजूद आपकी चलने की परेशानी और पैरों के दर्द को लगातार बढ़ा रहे हैं।
गलत प्रकार के फ्लैट शूज या बिना आर्च सपोर्ट वाले जूते पहनना
अक्सर लोग यह सोचते हैं कि हील्स से दूर रहकर पूरी तरह से फ्लैट जूते, स्नीकर्स या बैलेरीना पहनने से पैर हमेशा सुरक्षित और दर्दमुक्त रहेंगे। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक समतल और बिना किसी आर्च सपोर्ट वाले फ्लैट शूज भी पैरों के लिए उतने ही हानिकारक हो सकते हैं जितनी कि ऊंची हील। हमारे पैर के तलवे का प्राकृतिक आकार थोड़ा घुमावदार (Arch) होता है, जिसे चलने के दौरान कुशनिंग और सहारे की जरूरत होती है। जब आप ऐसे जूते पहनते हैं जिनमें सोल पूरी तरह से सपाट और कड़क होता है, तो पैर के प्लांटर फेशिया यानी तलवे की मांसपेशी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इस लगातार खिंचाव के कारण 'प्लांटर फेशिसाइटिस' (Planter Fasciitis) जैसी समस्या पैदा हो जाती है, जिसमें सुबह उठकर जमीन पर पैर रखते ही एड़ी में तेज चुभन और दर्द होता है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप केवल हील्स को ही दोष न दें, बल्कि अपने जूतों के इंसोल और आर्च सपोर्ट की गुणवत्ता की भी जांच करें, क्योंकि गलत फ्लैट फुटवियर भी आपकी इस परेशानी का एक बड़ा कारण हो सकते हैं।
शरीर में पोषक तत्वों की कमी और डिहाइड्रेशन की अनदेखी आदत
पैरों में दर्द, नसों में खिंचाव और चलने में असमर्थता का सीधा संबंध हमारे शरीर के अंदरूनी पोषण और वाटर बैलेंस से भी होता है। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम ऐसा खान-पान अपना लेते हैं जिसमें जरूरी विटामिन और मिनरल्स की भारी कमी होती है। शरीर में विटामिन डी3, कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन बी12 की कमी होने पर हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जिसके कारण थोड़ी सी भी दूर चलने पर पैरों में भारीपन और तीव्र दर्द महसूस होने लगता है। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने यानी डिहाइड्रेशन के कारण मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) और अकड़न की समस्या आम हो जाती है। जब शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ता है, तो पैर की मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पातीं और आपको हर कदम पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए, यदि आपके पैरों में लगातार दर्द बना हुआ है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर अपने ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं ताकि यह पता चल सके कि कहीं आपके शरीर में किसी आवश्यक पोषक तत्व की कमी तो नहीं है।
वजन का असंतुलन और गलत पॉश्चर में लंबे समय तक खड़े रहना
हमारे शरीर का वजन सीधे तौर पर हमारे पैरों के जोड़ों, घुटनों और तलवों पर असर डालता है। यदि आपका वजन आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से अधिक है, तो आपके पैरों को हर कदम पर आपके कुल वजन से कई गुना अधिक दबाव झेलना पड़ता है। अत्यधिक वजन के कारण पैरों के तलवे की गद्देदार परत घिसने लगती है और टखनों पर अत्यधिक तनाव आने से चलने में दर्द होने लगता है। इसके अलावा, आपकी दिनचर्या का पॉश्चर भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। यदि आपका काम ऐसा है जिसमें आपको लगातार कई-कई घंटे एक ही जगह खड़े रहना पड़ता है या आप गलत तरीके से बैठते-चलते हैं, तो शरीर का भार पैरों पर असमान रूप से पड़ता है। गलत पॉश्चर के कारण रीढ़ की हड्डी से लेकर कूल्हों और पैरों की नसों पर दबाव बनता है, जिससे साइटिका या नसों से जुड़ा दर्द पैरों तक फैल सकता है। इसलिए अपने वजन को नियंत्रित रखना और खड़े होने या चलने के सही तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है ताकि पैरों पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम किया जा सके।
मांसपेशियों में लचीलेपन की कमी और अत्यधिक शारीरिक सक्रियता या निष्क्रियता
हमारे शरीर की मांसपेशियां यदि लचीली (Flexible) नहीं हैं, तो उन्हें सामान्य गतिविधियां करने में भी कठिनाई होती है। कई लोग बिना किसी वार्म-अप के अचानक लंबी वॉक, रनिंग या एक्सरसाइज करना शुरू कर देते हैं, जिससे पिंडलियों (Calf muscles) और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियां अत्यधिक टाइट हो जाती हैं। इन कड़ी मांसपेशियों के कारण जब आप चलते हैं, तो पैरों पर खिंचाव पड़ता है और दर्द शुरू हो जाता है। इसके विपरीत, जो लोग पूरे दिन बिल्कुल सुस्त रहते हैं और किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि या स्ट्रेचिंग नहीं करते, उनकी मांसपेशियां कमजोर और अक्रिय हो जाती हैं, जिससे थोड़ा सा भी चलने पर उनमें थकान और दर्द होने लगता है। इसके अलावा, गलत साइज के मोजे पहनना या डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी पैरों में रक्त संचार प्रभावित होता है जिससे सुन्नपन और दर्द की शिकायत बढ़ती है। इन सभी कारणों को समय रहते पहचानकर अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव करके आप इस परेशानी से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं और अपने पैरों को स्वस्थ रख सकते हैं।