धर्म

आज कृत्तिका नक्षत्र और व्यतिपात योग का महासंयोग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग की हर खास बात

सनातन संस्कृति और हमारे दैनिक जीवन में पंचांग (Panchang) का बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने, शुभ-अशुभ समय को जानने तथा व्रत-त्योहारों की सही तिथि का निर्धारण करने के लिए पंचांग का अध्ययन करना सबसे उत्तम माध्यम माना जाता है। आज 28 अक्टूबर 2026 (बुधवार) का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास रहने वाला है। आज के दिन आसमान में कई अद्भुत योगों और नक्षत्रों का महासंयोग बन रहा है, जो विभिन्न राशियों के जातकों के लिए अलग-अलग प्रभाव लेकर आया है। आइए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद सागर पाठक (एस्ट्रोपत्री) के बताए गए आकलन के अनुसार विस्तार से जानते हैं कि आज 28 अक्टूबर 2026 के पंचांग के तहत सूर्य-चंद्रमा की स्थिति, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और नक्षत्रों का पूरा गणित क्या कहता है।

आज की तिथि, मास और संवत का संपूर्ण विवरण

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज का दिन बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना गया है। आइए जानते हैं आज के मुख्य पंचांगीय आंकड़े:

  • मास एवं पक्ष: वर्तमान में कार्तिक मास का कृष्ण पक्ष चल रहा है, जो आध्यात्मिक साधना और व्रत-उपवास के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

  • दिन और संवत: आज बुधवार का दिन है और विक्रम संवत 2083 चल रहा है।

  • तृतीया तिथि: आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जो अगले दिन यानी 29 अक्टूबर को तड़के 01 बजकर 06 मिनट तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा।

  • व्यतिपात और वरियान योग: आज के दिन बहुत ही खास 'व्यतिपात योग' का संयोग बन रहा है, जो प्रातः 07 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इसके बाद 'वरियान योग' शुरू हो जाएगा जो अगले दिन तड़के 03 बजकर 40 मिनट तक बना रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में व्यतिपात योग के दौरान किए गए जप, तप, ध्यान, दान और पूजन-पाठ का कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।

  • करण की स्थिति: दिन में दोपहर 02 बजकर 36 मिनट तक 'वणिज करण' रहेगा, जिसके बाद 'विष्टि (भद्रा) करण' की शुरुआत होगी।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति तथा उनकी राशियां

ग्रहों के राजा सूर्य और मन के कारक चंद्रमा की चाल हमारे जीवन और मानसिक स्थिति को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। आज के दिन इनकी स्थिति इस प्रकार है:

  • सूर्योदय और सूर्यास्त: आज सुबह सूर्योदय ठीक 06 बजकर 30 मिनट पर हुआ, जबकि शाम को सूर्यास्त का समय 05 बजकर 39 मिनट रहेगा।

  • चंद्रोदय और चंद्रास्त: आज शाम को चंद्रमा का उदय 07 बजकर 16 मिनट पर होगा, जबकि अगले दिन सुबह 08 बजकर 42 मिनट पर चंद्रमा अस्त होंगे।

  • ग्रहों की राशि: आज के दिन सूर्य देव तुला राशि (Libra) में विराजमान हैं, जबकि चंद्र देव वृषभ राशि (Taurus) में स्थित हैं। वृषभ राशि में चंद्रमा का होना जातकों को स्थिरता और बौद्धिक संतुलन प्रदान करता है।

आज के शुभ मुहूर्त: कब करें अपने जरूरी और मांगलिक कार्य?

यदि आप आज के दिन कोई नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, कोई बड़ी खरीदारी करना चाहते हैं या किसी शुभ यात्रा पर निकलना चाहते हैं, तो मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आज के शुभ समय इस प्रकार हैं:

  • अभिजीत मुहूर्त: आज के दिन कोई विशेष अभिजीत मुहूर्त नहीं है, इसलिए विशेष बड़े कार्यों के लिए अन्य शुभ चौघड़िया या अमृत काल का सहारा लेना उचित रहेगा।

  • अमृत काल: आज का सबसे बेहतरीन और फलदायी समय 'अमृत काल' माना जा रहा है, जो प्रातः 11 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए सभी कार्य सफल और शुभ फल देने वाले होते हैं।

आज के अशुभ समय और राहुकाल: इन समयों में बरतें विशेष सावधानी

ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे समय भी बताए गए हैं जिनमें किसी भी प्रकार का नया या शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। आज के अशुभ काल निम्नलिखित हैं:

  • राहुकाल (Rahu Kaal): दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक का समय राहुकाल का रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ, नया या व्यावसायिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

  • गुलिकाल (Gulika Kaal): प्रातः 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक गुलिकाल रहेगा।

  • यमगण्ड काल (Yamagandam): प्रातः 07 बजकर 54 मिनट से प्रातः 09 बजकर 17 मिनट तक का समय यमगण्ड के अधीन रहेगा।

आज का नक्षत्र: कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव और उसकी विशेषताएं

आज के दिन चंद्रदेव कृत्तिका नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। कृत्तिका नक्षत्र दोपहर 01 बजकर 26 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद रोहिणी नक्षत्र का आरंभ हो जाएगा। आइए जानते हैं कृत्तिका नक्षत्र से जुड़ी खास बातें:

  • नक्षत्र के स्वामी व देवता: कृत्तिका नक्षत्र के मुख्य स्वामी ग्रह सूर्यदेव हैं, जबकि इसके राशि स्वामी मंगलदेव और शुक्रदेव हैं। इस नक्षत्र के अधिदेवता अग्निदेव (Lord Agni) हैं, और इसका प्रतीक चिन्ह 'भाला या अस्त्र' माना जाता है।

  • व्यक्तिगत विशेषताएं: कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेने वाले या इस नक्षत्र के प्रभाव वाले लोग तेज बुद्धि, अत्यधिक स्वाभिमानी, धार्मिक विचारों वाले और परंपरावादी होते हैं। वे स्वभाव से थोड़े क्रोधी, निडर, ऊर्जावान और समाज में प्रभावशाली होते हैं। हालांकि, वे कई बार अपनी बात को लेकर बहुत दृढ़ और कठोर भी हो सकते हैं। आज इस नक्षत्र के प्रभाव से जातकों को अपनी कार्यक्षमता दिखाने के कई बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।

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