धर्म

करवाचौथ की खरीदारी के लिए कौन-सा दिन रहेगा सबसे शुभ? जानिए क्या अस्त शुक्र का पड़ेगा सुहाग के सामान पर असर

सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े और आस्था के महापर्व करवा चौथ की तैयारियां बाजारों में जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में प्रेम की कामना के साथ रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस पावन पर्व से पहले महिलाएं नए वस्त्र, सोलह श्रृंगार, करवा, पूजा थाली और सोने-चांदी के आभूषणों की जमकर खरीदारी करती हैं। लेकिन इस बार महिलाओं और परिवारों के मन में एक बड़ा ज्योतिषीय संशय बना हुआ है कि क्या वर्तमान में आकाश मंडल में चल रहे शुक्र ग्रह के अस्त होने (Combustion) का प्रभाव करवाचौथ के व्रत या खरीदारी पर पड़ेगा? वैदिक ज्योतिष में शुक्र को सौंदर्य, भौतिक सुख, वैवाहिक सामंजस्य और प्रेम का नैसर्गिक कारक ग्रह माना गया है। ऐसे में शुक्र के अस्त रहने के दौरान करवाचौथ की खरीदारी किस दिन और कैसे करना श्रेष्ठ रहेगा, इसे लेकर ज्योतिषाचार्यों ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

क्या करवाचौथ की खरीदारी और व्रत पर पड़ेगा अस्त शुक्र का असर?

ज्योतिष शास्त्र का यह सर्वमान्य नियम है कि जब सूर्य और शुक्र ग्रह एक निश्चित कोणीय दूरी पर आमने-सामने आते हैं, तो शुक्र का तेज सूर्य के प्रभाव में छिप जाता है, जिसे 'शुक्र अस्त' या 'तारा डूबना' कहा जाता है। जब भी शुक्र या देवगुरु बृहस्पति अस्त होते हैं, तो सनातन धर्म में विवाह, द्विरागमन (गौना), नए घर की नींव रखना, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे 'काम्य संस्कार' यानी जीवन में पहली बार किए जाने वाले नवीन मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

लेकिन जब बात करवाचौथ, तीज या जितिया जैसे नित्य और नैमित्तिक व्रतों की आती है, तो धर्मग्रंथों का नियम बिल्कुल स्पष्ट है। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, जो व्रत प्रतिवर्ष निश्चित तिथि पर अपने नियमित क्रम से आते हैं, उन पर शुक्र या गुरु के अस्त होने का कोई दोष नहीं लगता। करवाचौथ एक ऐसा व्रत है जो विवाहिताएं अपने पति के मंगल और दांपत्य धर्म के निर्वहन के लिए हर साल रखती हैं। इसलिए अस्त शुक्र का करवाचौथ के व्रत, उसकी पूजा और व्रत से जुड़ी आवश्यक सुहाग सामग्री की खरीदारी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। आप बिना किसी संकोच या भय के पूरे भक्ति भाव से पूजा और खरीदारी कर सकती हैं।

करवाचौथ की खरीदारी के लिए सबसे शुभ दिन कौन-सा रहेगा?

करवाचौथ के लिए नए परिधान, श्रृंगार सामग्री और पूजन का सामान खरीदने के लिए कुछ विशेष दिनों को ज्योतिषीय रूप से सबसे कल्याणकारी और फलदायी माना गया है:

  • शुक्रवार का दिन (सौभाग्य और श्रृंगार के लिए सर्वश्रेष्ठ): शुक्रवार का दिन स्वयं देवी लक्ष्मी और माता पार्वती को समर्पित है। चूंकि करवाचौथ पूरी तरह अखंड सुहाग और सौंदर्य का पर्व है, इसलिए शुक्रवार के दिन लाल, गुलाबी, मैरून या चटकीले रंग की साड़ियां, लहंगे, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री खरीदना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन खरीदारी करने से दांपत्य में माधुर्य बढ़ता है।

  • रविवार का दिन (सोने-चांदी और आभूषणों के लिए उत्तम): रविवार भगवान सूर्य का दिन है और सूर्य देव सोने के कारक माने जाते हैं। यदि आप करवाचौथ पर पति के लिए कोई उपहार या अपने लिए सोने-चांदी के सिक्के, बिछिया, पायल या मंगलसूत्र खरीदना चाहती हैं, तो रविवार का दिन सबसे उपयुक्त रहता है।

  • सोमवार और बुधवार (सौम्य और स्थिर खरीदारी): सोमवार का दिन चंद्रमा का है, जो करवाचौथ पूजन के केंद्र में रहते हैं। इस दिन चांदी के आभूषण या मिट्टी/तांबे का करवा खरीदना शुभ होता है। वहीं बुधवार का दिन व्यापार और सुख-समृद्धि का माना गया है, जिस दिन घरेलू वस्तुएं या गिफ्ट्स खरीदे जा सकते हैं।

  • शनिवार और मंगलवार को क्या न खरीदें: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, करवाचौथ की खरीदारी के दौरान शनिवार को धारदार वस्तुएं (जैसे कैंची, सुई आदि) और गहरे काले रंग के कपड़े खरीदने से बचना चाहिए। वहीं मंगलवार को श्रृंगार की नई वस्तुएं खरीदने के बजाय अन्य दिनों को प्राथमिकता देना ज्यादा श्रेयस्कर माना जाता है।

खरीदारी करते समय किस समय का रखें ध्यान? शुभ मुहूर्त के नियम

खरीदारी किसी भी दिन करें, लेकिन दिन के दौरान चौघड़िया और शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखना खरीदारी को और ज्यादा सुखद बना देता है:

  1. अभिजीत मुहूर्त: हर दिन दोपहर लगभग 11:40 बजे से 12:25 बजे के बीच का समय अभिजीत मुहूर्त होता है। इस काल में किसी भी प्रकार की खरीदारी या नए काम की शुरुआत बिना किसी दोष के पूरी तरह शुभ मानी जाती है।

  2. शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया: जब भी बाजार जाएं, तो दिन के शुभ, लाभ या अमृत चौघड़िया में ही दुकान में प्रवेश कर खरीदारी आरंभ करें।

  3. राहुकाल में खरीदारी से बचें: हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का समय राहुकाल का होता है (जैसे शुक्रवार को सुबह 10:30 से 12:00, शनिवार को सुबह 09:00 से 10:30, रविवार को सायं 04:30 से 06:00)। इस अशुभ समयावधि में आभूषणों या कीमती वस्तुओं का बिल कटवाने या बयाना देने से बचना चाहिए।

सुहाग सामग्री खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ख्याल

करवाचौथ की थाली और श्रृंगार पिटारी तैयार करते समय रंगों के चयन का खास ध्यान रखा जाता है। सुहागिन महिलाओं को काले, गहरे नीले, भूरे या सफेद रंग के कपड़े और चूड़ियां खरीदने से सख्त परहेज करना चाहिए। करवाचौथ की पूजा में लाल, सिंदूरी, पीला, नारंगी और रानी गुलाबी रंग सबसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं।

यदि आप धातु का करवा खरीद रही हैं, तो पीतल, तांबे या चांदी के करवे को प्राथमिकता दें; स्टील या लोहे के बर्तन को पूजा में सीधा स्थान देने से बचें। मिट्टी का पारंपरिक टोटीदार करवा भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। आस्था, श्रद्धा और प्रेम के इस महापर्व पर बिना किसी ज्योतिषी वहम के शुभ मुहूर्त में अपनी पसंद का सुहाग सामान खरीदें और पूरे उल्लास के साथ करवाचौथ के पावन व्रत का संकल्प लें।

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