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खाड़ी के बढ़ते संकट के बीच विदेश मंत्रियों की उच्चस्तरीय बातचीत

अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते हालात के बीच भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीति का एक और मजबूत उदाहरण पेश किया है। पिछले महज एक सप्ताह के भीतर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (Dr. S. Jaishankar) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्री के बीच एक बार फिर फोन पर उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। इस लगातार हो रहे संपर्क से यह साफ जाहिर होता है कि नई दिल्ली खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों और सुरक्षा समीकरणों पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए है। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब पूरी दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया के नाजुक हालातों पर टिकी हुई हैं।

खाड़ी क्षेत्र के हालात पर गहरी चिंता और नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा

इस महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, बढ़ते सैन्य संघर्ष और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा व संरक्षा पर विस्तार से चर्चा की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि जिस तरह से मध्य पूर्व में तनाव का दायरा बढ़ रहा है, उससे वैश्विक शांति के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। यूएई, जो खाड़ी क्षेत्र में भारत का एक अत्यंत करीबी और रणनीतिक साझेदार देश है, वहां की मौजूदा स्थिति पर भारत का यह लगातार संवाद दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और घनिष्ठ कूटनीतिक समन्वय को रेखांकित करता है। भारत ने दोहराया है कि किसी भी तरह के सैन्य टकराव से बचने के लिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र स्थायी समाधान है।

आर्थिक गलियारे, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर मंथन

यूएई और भारत के बीच केवल सुरक्षा मामलों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि इस उच्चस्तरीय संवाद के केंद्र में ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और व्यापारिक मार्ग भी रहे हैं। खाड़ी देशों में उत्पन्न होने वाले किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल के आयात पर पड़ता है। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की प्रगति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुरक्षित रखने के लिए दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को सुचारू बनाए रखने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए दोनों विदेश मंत्रियों ने आपसी खुफिया और कूटनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और शांतिप्रिय भूमिका

आज के दौर में जब दुनिया कई मोर्चों पर युद्ध और संघर्ष की आग में सुलग रही है, भारत एक जिम्मेदार और प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में सभी पक्षों के साथ संतुलन साधने की नीति पर चल रहा है। चाहे वह पश्चिम एशिया का संकट हो या अन्य अंतरराष्ट्रीय विवाद, भारत ने हमेशा 'तटस्थता' के बजाय 'शांति और संवाद' के पक्ष को मजबूती से रखा है। यूएई के साथ एक हफ्ते के भीतर दो बार उच्चस्तरीय बातचीत होना इस बात का प्रमाण है कि भारत केवल अपनी ऊर्जा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति बहाली के प्रयासों में भी एक सक्रिय मध्यस्थ और विश्वसनीय भागीदार की भूमिका निभा रहा है।

भविष्य के रणनीतिक कदम और क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीदें

आने वाले दिनों में भारत और यूएई के बीच कूटनीतिक स्तर पर और भी कई दौर की बैठकें होने की संभावना है। दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और अधिक न बिगड़े, जिससे वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों और अन्य प्रवासियों के हितों पर कोई आंच न आए। भारत की यह त्वरित और दूरदर्शी कूटनीति न केवल उसकी विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट के हर दौर में भारत अपने मित्र देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

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