त्योहारों में भ्रामक वीडियो पर रेलवे का शिकंजा: 2 इंस्टाग्राम हैंडलर्स के खिलाफ FIR दर्ज

त्योहारी सीजन में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों की कथित अव्यवस्था से जुड़े फर्जी, पुराने और भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय रेलवे ने कड़ा कानूनी रुख अपना लिया है। उत्तर रेलवे (Northern Railway) ने रेलवे परिसरों और ट्रेनों की भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में दो इंस्टाग्राम हैंडलर्स के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई है। रेलवे प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आम यात्रियों द्वारा वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन सनसनी फैलाने और व्यूज बटोरने के लिए पुराने या अन्य स्थानों के वीडियो को मौजूदा त्योहारी भीड़ से जोड़कर पेश करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
पुराने फुटेज को वर्तमान बताकर फैलाई जा रही थी दहशत: जानें क्या है पूरा मामला
दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की स्वाभाविक भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ सोशल मीडिया क्रिएटर्स और पेजों द्वारा पुरानी भगदड़, ट्रेन की खिड़कियों से घुसते यात्रियों और पूर्व वर्षों की दुर्घटनाओं या अव्यवस्थाओं के वीडियो को ताजा बताकर शेयर किया जा रहा था। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) के अनुसार, इन वीडियोज की वजह से घर जाने वाले यात्रियों और उनके परिजनों के बीच अनावश्यक भय और अफरा-तफरी का माहौल बन रहा था। रेलवे की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने जब पड़ताल की, तो पाया कि संबंधित इंस्टाग्राम हैंडलर्स द्वारा प्रसारित किए गए विजुअल्स पूरी तरह असत्य और संदर्भ से परे थे, जिसके बाद तुरंत पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराया गया।
24×7 साइबर निगरानी और रेलवे की कानूनी चेतावनी
रेलवे ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों को रोकने के लिए एक विशेष 24×7 डिजिटल मॉनिटरिंग सेल सक्रिय कर दिया है, जो फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर पैनी नजर रख रहा है। रेलवे ने सार्वजनिक अपील जारी कर कहा है कि किसी भी गैर-प्रमाणित वीडियो, तस्वीर या खबर को बिना सच जाने शेयर या रीपोस्ट न करें। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की गलत छवि पेश करने, दहशत फैलाने या झूठी जानकारी प्रचारित करने में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और रेलवे एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।