ब्राजील में महामुकाबला: लूला बनाम फ्लेवियो बोल्सोनारो के बीच आर-पार की जंग

ब्राजील के करोड़ों मतदाता देश के भविष्य और सत्ता की बागडोर तय करने के लिए राष्ट्रपति चुनाव के बेहद कड़े और रोमांचक दूसरे दौर में मतदान केंद्र पहुंच रहे हैं। लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में यह चुनावी जंग दो ध्रुवीय विचारधाराओं का खुला टकराव बन चुकी है। एक तरफ अनुभवी वामपंथी नेता और मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा एक और कार्यकाल सुरक्षित करने के लिए मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ उनके सामने दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो ताल ठोक रहे हैं। फ्लेवियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के सबसे बड़े बेटे हैं और उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तर्ज पर राष्ट्रवाद, मुक्त बाजार और सांस्कृतिक रूढ़िवादिता को अपना प्रमुख हथियार बनाया है। चुनाव पूर्व सभी जनमत सर्वेक्षण और राजनीतिक विश्लेषक दोनों नेताओं के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगा रहे हैं। इस ऐतिहासिक चुनाव के परिणाम केवल ब्राजील की घरेलू राजनीति को ही नहीं बदलेंगे, बल्कि वाशिंगटन के साथ उसके कूटनीतिक रिश्तों, ब्रिक्स (BRICS) की भावी रणनीतियों और वैश्विक व्यापार संतुलन पर भी गहरा असर डालेंगे।
पहले दौर में फ्लेवियो बोल्सोनारो की बढ़त और लूला की वापसी की चुनौती
इस महीने की शुरुआत में संपन्न हुए पहले दौर के मतदान ने ब्राजील के राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया था। चुनावी मैदान में उतरे फ्लेवियो बोल्सोनारो ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए मौजूदा राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के मुकाबले 22 लाख यानी 2.2 मिलियन से अधिक मतों की ठोस बढ़त हासिल कर ली थी। हालांकि, पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट न मिलने के कारण मुकाबला रन-ऑफ यानी दूसरे दौर में पहुंच गया। अब सारा दारोमदार उन मतदाताओं पर टिका है जिन्होंने पहले दौर में अन्य छोटे उम्मीदवारों को वोट दिया था या जो मतदान से दूर रहे थे। लूला का मुख्य प्रयास श्रमिक वर्ग, पूर्वोत्तर के पारंपरिक गढ़ और वामपंथी झुकाव वाले नागरिकों को लामबंद करना है। दूसरी ओर, फ्लेवियो बोल्सोनारो कृषि व्यवसाय, औद्योगिक लॉबी और धार्मिक रूप से रूढ़िवादी मतदाताओं के सहारे जीत का जादुई आंकड़ा छूने की जुगत में हैं। वाशिंगटन द्वारा 2025 में ब्राजीलियाई उत्पादों पर लगाए गए सख्त टैरिफ के बाद से देश का कारोबारी तबका भी इस चुनाव को बेहद संवेदनशीलता से देख रहा है।
चुनावी रण के वो 5 अहम मुद्दे जिन्होंने तय की वोटरों की दिशा
ब्राजील के इस चुनाव में पांच प्रमुख मुद्दे केंद्र बिंदु बनकर उभरे हैं, जिन्होंने जनता के बीच तीव्र विभाजन पैदा किया है। पहला और सबसे संवेदनशील मुद्दा महंगाई और गिरती क्रय शक्ति है। ब्राजील की महंगाई दर सेंट्रल बैंक के 3 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से लगातार ऊपर बनी हुई है। क्वेस्ट (Quaest) द्वारा कराए गए ताजा जनमत सर्वेक्षण में दो-तिहाई से अधिक ब्राजीलियाई नागरिकों ने स्पष्ट कहा कि पिछले एक साल में उनकी दैनिक चीजें खरीदने की क्षमता काफी कम हो गई है। लूला आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और आम लोगों के लिए कर्ज सस्ता करने का वादा कर रहे हैं, जबकि बोल्सोनारो का कहना है कि वे ब्याज दरों को नीचे लाने के लिए सरकारी खर्चों पर लगाम लगाएंगे।
दूसरा बड़ा मुद्दा सार्वजनिक वित्त और भारी सरकारी कर्ज का है। लूला के वर्तमान शासनकाल में ब्राजील का सार्वजनिक ऋण बढ़कर देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 82.9 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। उच्च ब्याज दरों ने आम परिवारों के साथ-साथ छोटे और बड़े व्यापारियों पर भारी वित्तीय दबाव बना दिया है। फ्लेवियो बोल्सोनारो ने सत्ता में आने के 18 महीनों के भीतर जीडीपी के 1.5 प्रतिशत के बराबर प्राथमिक राजकोषीय संतुलन साधने का रोडमैप पेश किया है। इसके विपरीत, लूला ने 2030 तक जीडीपी के लगभग 1.3 प्रतिशत का प्राथमिक बजट अधिशेष हासिल करने का अधिक धीमा लक्ष्य सामने रखा है।
तीसरा जलता हुआ मुद्दा अपराध और आंतरिक सुरक्षा का है। हिंसक वारदातों और संगठित ड्रग गिरोहों से त्रस्त जनता को लुभाने के लिए बोल्सोनारो ने बेहद सख्त तेवर अपनाए हैं। उन्होंने गंभीर यौन अपराधियों के लिए 'केमिकल कैस्ट्रेशन' यानी रासायनिक तरीके से नपुंसक बनाने का कानून लाने और अधिकतम सुरक्षा वाली नई जेलें बनाने की घोषणा की है। वहीं, लूला का दृष्टिकोण सामाजिक सुधार पर केंद्रित है। वे अपराध की जड़ पर प्रहार करने के लिए गरीब बस्तियों में कल्याणकारी निवेश बढ़ाने और केवल खतरनाक गैंगस्टरों के लिए अलग से संघीय जेल क्षमता बढ़ाने का वादा कर रहे हैं।
चौथा अहम बिंदु दोनों खेमों पर लगे भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं। यह विडंबना है कि दोनों ही प्रमुख उम्मीदवारों के करीबी रिश्तेदार गंभीर वित्तीय जांच के घेरे में हैं। फ्लेवियो बोल्सोनारो पर पूर्व बैंकर डैनियल वोर्कारो से मिले संदेहास्पद फंड के जरिए भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी के आरोपों की जांच चल रही है, जिसका इस्तेमाल उनके पिता पर बायोपिक बनाने के नाम पर किया गया था। दूसरी ओर, लूला के अपने बेटे पर भी सत्ता के दुरुपयोग, अवैध प्रभाव और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में जांच एजेंसियां शिकंजा कस रही हैं। दोनों उम्मीदवारों ने इन सभी कानूनी मामलों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
पांचवां और सबसे निर्णायक मुद्दा विदेश नीति, वैश्विक गठबंधन और डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव है। फ्लेवियो बोल्सोनारो खुलकर अमेरिका, इजरायल और अर्जेंटीना के साथ अपनी विदेश नीति को संरेखित करने की वकालत कर रहे हैं। उनका मानना है कि लूला की नीतियों के चलते इन पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों से ब्राजील के संबंध बेहद ठंडे पड़ गए हैं। बोल्सोनारो दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) के दोहन और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अमेरिकी निवेश को खुली छूट देना चाहते हैं। इसके उलट, लूला बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था के हिमायती हैं। वे लैटिन अमेरिकी व्यापारिक गुट मर्कोसुर और ब्रिक्स (BRICS) गठबंधन को प्राथमिकता दे रहे हैं। लूला ने ट्रंप प्रशासन की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों और टैरिफ की तीखी निंदा करते हुए लैटिन अमेरिका के आंतरिक मामलों में वाशिंगटन के अनावश्यक हस्तक्षेप पर सख्त आपत्ति जताई है।
ब्राजील के लोकतंत्र का भविष्य और पूर्व राष्ट्रपति की सजा का सवाल
यह चुनाव केवल आर्थिक नीतियों का टकराव नहीं है, बल्कि ब्राजील की लोकतांत्रिक संस्थाओं के अस्तित्व की लड़ाई भी माना जा रहा है। फ्लेवियो बोल्सोनारो ने सार्वजनिक रूप से वादा किया है कि यदि वे राष्ट्रपति बनते हैं, तो वे अपने पिता जायर बोल्सोनारो को तत्काल राष्ट्रपति माफी (Pardon) प्रदान करेंगे। जायर बोल्सोनारो वर्तमान में 2023 में राजधानी ब्रासीलिया में सरकारी इमारतों पर हुए हिंसक हमलों और तख्तापलट की साजिश रचने के दोष में न्यायिक हिरासत और नजरबंदी का सामना कर रहे हैं। लूला डा सिल्वा ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए जनता को सचेत किया है कि बोल्सोनारो परिवार को सत्ता सौंपना देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सीधे खतरे में डालना होगा। लूला का तर्क है कि सत्ता का यह बदलाव ब्राजील को एक बार फिर तानाशाही मानसिकता की ओर धकेल देगा। अब ब्राजील की जनता के हाथ में यह फैसला है कि वह लूला के कल्याणकारी समाजवाद पर भरोसा बनाए रखती है या फ्लेवियो बोल्सोनारो के आक्रामक दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद को देश की नई दिशा चुनती है।