डेथ ट्राइंगल पर NCB का सबसे बड़ा प्रहार: ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ में 38 ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड

भारत की सुरक्षा एजेंसियों और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पूर्वोत्तर के सबसे कुख्यात 'डेथ ट्राइंगल कॉरिडोर' में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट की कमर तोड़ते हुए अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस गोपनीय और बहुस्तरीय मिशन को 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' नाम दिया गया, जिसके तहत केंद्रीय एजेंसियों ने असम, मिजोरम और मणिपुर के दुर्गम इलाकों में एक साथ 38 संवेदनशील ठिकानों पर जबर्दस्त छापेमारी की। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य केवल ड्रग्स की खेप पकड़ना नहीं था, बल्कि सीमा पार से संचालित होने वाले इस नार्को-हवाला नेटवर्क के पूरे वित्तीय ढांचे और आपूर्ति तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकना था।
इस मेगा क्रैकडाउन के दौरान जांच एजेंसियों ने 100 करोड़ रुपये के अवैध हवाला कारोबार की गुप्त कड़ियों का पर्दाफाश करते हुए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में लिप्त 1424 संदिग्ध बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है। इसके साथ ही विभिन्न ठिकानों से 17.82 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई है और इस सिंडिकेट से जुड़े 18 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस बड़ी कामयाबी की पुष्टि करते हुए 31 दिसंबर 2029 तक देश को पूरी तरह ड्रग्स-मुक्त बनाने के भारत के अटूट संकल्प को दोहराया।
भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच बुना गया था तस्करी का खूनी जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के मिलन बिंदु यानी 'डेथ ट्राइंगल कॉरिडोर' के जरिए नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही चला रहा था। म्यांमार की विद्रोही पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों में उत्पादित होने वाले उच्च श्रेणी के सिंथेटिक ड्रग्स, मेथाम्फेटामाइन और हेरोइन को सीमावर्ती रास्तों से पूर्वोत्तर के राज्यों में उतारा जाता था। इसके बाद इस अवैध खेप को भारत के प्रमुख महानगरों और बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में खपाया जाता था।
इस गिरोह का मुख्य संचालन केंद्र मिजोरम राज्य बना हुआ था, जहां से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित किया जाता था, जबकि मणिपुर और असम को प्रमुख ट्रांजिट रूट के रूप में उपयोग में लाया जा रहा था। कई महीनों तक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्थानीय पुलिस इकाइयों के बीच चली गोपनीय बैठकों और वित्तीय ट्रैकिंग के बाद इस ऑपरेशन का सटीक खाका तैयार किया गया। 23 अक्टूबर की तड़के शुरू हुई इस छापेमारी में मिजोरम के आइजोल, चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित व्यापारिक कस्बे जोखाथर में केंद्रीय बलों ने अचानक दबिश देकर तस्करों को भागने का कोई मौका नहीं दिया।
हवाला सिंडिकेट का भंडाफोड़ और दिल्ली से मास्टरमाइंड के सहयोगी की गिरफ्तारी
'ऑपरेशन ट्राइडेंट' की सबसे अहम कामयाबी इसके वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करना रहा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एनसीबी के वित्तीय विशेषज्ञों ने पाया कि ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाली मोटी रकम को सफेद करने और म्यांमार स्थित सरगनाओं तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर हवाला नेटवर्क का उपयोग हो रहा था। पूर्वोत्तर के स्थानीय व्यापारियों, शेल कंपनियों और फर्जी नामों पर खोले गए 1424 बैंक खातों के जरिए 100 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी, जिसे डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स की मदद से चिन्हित कर तत्काल सील कराया गया।
इस सिंडिकेट के तार दिल्ली से लेकर म्यांमार तक फैले हुए थे। विभिन्न राज्यों में हफ्तों तक चली निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के बाद एजेंसियों ने दिल्ली से प्रमुख सहयोगी थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा को धर दबोचा। जांच में सामने आया कि इस गिरोह का शीर्ष सरगना म्यांमार में सुरक्षित ठिकाने पर बैठकर पूरा चक्रव्यूह रचता है और उसके खिलाफ अकेले मिजोरम में ही एनडीपीएस एक्ट के 10 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। हालांकि, भारतीय सीमा के भीतर म्यांमार से आने वाली खेपों की लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी संभालने वाले वुंगखानथाना को भी एजेंसियों ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।
असम और मणिपुर कॉरिडोर पर कसा शिकंजा, 2029 तक ड्रग्स-मुक्त भारत का संकल्प
एनसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क केवल हालिया दिनों की उपज नहीं है, बल्कि कई वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था। इससे पहले इस गिरोह के हवाला प्रबंधक ललरमपारी को दो वर्ष पूर्व ही सलाखों के पीछे भेज दिया गया था। वहीं असम के कछार क्षेत्र में ड्रग्स की इंटर-स्टेट आवाजाही का मुख्य कर्ताधर्ता अबू सालेह उर्फ सैफुद्दीन पिछले साल ही पकड़ा गया था। इन पूर्ववर्ती गिरफ्तारियों के डिजिटल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करने के बाद ही 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' की रूपरेखा तय हुई थी, जिसने मणिपुर के चूड़चांदपुर और असम के कछार ट्रांजिट कॉरिडोर पर बचे हुए तस्करों का पूरी तरह सफाया कर दिया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि जब तक देश से नार्को-टेरर और ड्रग्स कार्टेल्स का पूर्ण खात्मा नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षा बलों का यह कड़ा प्रहार निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने असम, मिजोरम और मणिपुर पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियों के बेहतरीन अंतर-राज्यीय समन्वय की सराहना की। इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल पूर्वोत्तर में सक्रिय नार्को-गठजोड़ को बेअसर किया है, बल्कि सीमा पार से होने वाली देश-विरोधी वित्तीय गतिविधियों को भी गहरा आघात पहुंचाया है।