उत्तर प्रदेश

यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर के 4000 लोगों ने किया टोल फ्री आवेदन, घोषणा के एक महीने बाद भी क्यों नहीं मिली छूट

ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र के निवासियों के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर टोल फ्री आवागमन का सपना अभी भी अधर में लटका नजर आ रहा है। स्थानीय नागरिकों को टोल टैक्स से पूर्ण मुक्ति दिलाने के आधिकारिक दावों और वादों के बाद क्षेत्र के लगभग चार हजार लोगों ने निर्धारित पोर्टल पर अपने आवेदन जमा कराए थे। हालांकि, घोषणा के एक महीने से भी अधिक का समय बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर एक भी आवेदक को टोल शुल्क में छूट का सीधा लाभ नहीं मिल सका है। इस प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी देरी के चलते स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों और रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों में भारी असंतोष पनप रहा है। 17 सितंबर से इस छूट व्यवस्था को धरातल पर लागू करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन धरातल पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते ग्रेटर नोएडा स्थित जिला मुख्यालय, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों में जाने वाले आम नागरिकों, कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं और दैनिक कामगारों के लिए यह मार्ग जीवन रेखा की तरह है। स्थानीय लोग पिछले 14 वर्षों से लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि परियोजना से प्रभावित और आसपास बसे जेवर के मूल निवासियों को टोल से मुक्त रखा जाए। इसके अलावा किसान संगठन यमुना एक्सप्रेसवे के खुर्जा अंडरपास पर पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ियां बनाने और जेवर की जनता के लिए पहचान पत्र के जरिए निशुल्क आवागमन की व्यवस्था लागू करने को लेकर कई बार बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और महापंचायतें भी कर चुके हैं।

17 सितंबर को हुआ था छूट का ऐलान, दस्तावेज सत्यापन के बाद भी नहीं बनी बात

क्षेत्रीय जनता की इस डेढ़ दशक पुरानी मांग को संज्ञान में लेते हुए जेवर के स्थानीय विधायक धीरेंद्र सिंह और यमुना एक्सप्रेसवे टोल प्रबंधन की साझा सहमति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस यानी 17 सितंबर के अवसर पर जेवर वासियों को टोल से राहत देने की सार्वजनिक घोषणा की गई थी। उस दौरान एक्सप्रेसवे प्रबंधन की ओर से निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले स्थानीय वाहन स्वामियों के लिए एक आधिकारिक वेब लिंक जारी किया गया था। यह तय किया गया था कि पहचान पत्र, निवास प्रमाण और वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) जैसे आवश्यक दस्तावेजों के ऑनलाइन सत्यापन के उपरांत गाड़ियों को फास्टैग डेटाबेस में छूट श्रेणी में मैप कर दिया जाएगा।

घोषणा के तुरंत बाद जेवर तहसील क्षेत्र के लगभग चार हजार उत्साही नागरिकों ने उम्मीद के साथ अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर दिए। लोगों को यह आशा थी कि अब उन्हें दैनिक आवागमन के दौरान अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। परंतु हकीकत यह है कि आज भी जब वे जेवर टोल प्लाजा से गुजरते हैं, तो उनके फास्टैग से पूरा टोल शुल्क कट रहा है या उन्हें नकद भुगतान करना पड़ रहा है। जब इस विषय पर टोल प्रबंधन से उनका आधिकारिक रुख जानने का प्रयास किया गया, तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर या स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई, जिससे जनता में यह संदेश जा रहा है कि यह कदम केवल तात्कालिक आक्रोश को शांत करने की एक कवायद भर थी।

रोजमर्रा के आवागमन पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ, जनता में बढ़ रहा आक्रोश

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जेवर क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों, अदालती तारीखों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के सिलसिले में हर दिन गौतमबुद्ध नगर जिला मुख्यालय यानी ग्रेटर नोएडा और नोएडा की ओर जाना पड़ता है। इसी तरह बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई के लिए नॉलेज पार्क और अन्य तकनीकी विश्वविद्यालयों का रुख करते हैं। ऐसे में दिन में दो से तीन बार एक्सप्रेसवे से होकर गुजरने वाले परिवारों पर हर महीने हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ केवल टोल टैक्स के रूप में पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी बहुमूल्य उपजाऊ जमीनें इस एक्सप्रेसवे और आगामी विकास परियोजनाओं के लिए ली गई थीं, लेकिन उन्हें ही अपनी ही जमीन पर बने राजमार्ग से गुजरने के लिए भारी शुल्क चुकाना पड़ रहा है। घोषणा के बाद लोगों ने उम्मीद में सारे कागजात पूरे किए थे, लेकिन अब तक किसी एक भी वाहन को टोल माफी का ग्रीन सिग्नल न मिलना स्थानीय प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि शीघ्र ही पोर्टल पर पंजीकृत वाहनों को छूट नहीं दी गई, तो किसान संगठनों ने दोबारा आंदोलन की राह पकड़ने की चेतावनी दी है।

पांच जिलों से गुजरता है 165 किमी लंबा एक्सप्रेसवे, टोल प्रबंधन के सामने खड़ी हुई बड़ी दुविधा

इस बहुप्रतीक्षित राहत योजना के लागू न हो पाने के पीछे टोल प्रबंधन और संबंधित प्राधिकरणों की एक बड़ी आंतरिक दुविधा मानी जा रही है। 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेसवे केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अलीगढ़, मथुरा, हाथरस और आगरा जिलों के विशाल ग्रामीण और शहरी इलाकों से होकर गुजरता है। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही जेवर के स्थानीय लोगों को टोल फ्री करने की प्रक्रिया शुरू हुई, वैसे ही एक्सप्रेसवे के किनारे बसे अन्य सभी चारों जिलों के किसान संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में समान टोल छूट की पुरजोर मांग उठानी शुरू कर दी।

टोल प्रबंधन की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि केवल जेवर के निवासियों को भौगोलिक आधार पर टोल फ्री सुविधा प्रदान कर दी जाती है, तो कानूनी और सामाजिक रूप से अलीगढ़, मथुरा, हाथरस और आगरा के किसानों को इस दायरे से बाहर रखना असंभव हो जाएगा। यदि पूरे 165 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी स्थानीय वाहनों को छूट दी गई, तो टोल कंपनी के वित्तीय संतुलन और राजस्व वसूली पर गहरा संकट खड़ा हो जाएगा। इसी नीतिगत पेंच और अंतर-जिला विवाद के डर से टोल प्रबंधन यह तय नहीं कर पा रहा है कि जेवर के लिए जारी किए गए लिंक के तहत आवेदनों को मंजूरी दी जाए या पूरी प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए। फिलहाल जेवर के चार हजार आवेदक अपनी फाइलों के निस्तारण और वादे के पूरे होने की राह देख रहे हैं।

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