उत्तर प्रदेश

NH-9 पर रोज का सिरदर्द: छिजारसी से कनावनी तक रेंग रहे पहिए, नोएडा-गाजियाबाद सफर में घंटों की बर्बादी

दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन कहे जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-9 (NH-9) पर सफर करना अब दैनिक यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रह गया है। लचर ट्रैफिक प्रबंधन और दोषपूर्ण रोड इंजीनियरिंग के कारण इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे और उसके सर्विस लेन पर हर दिन भीषण जाम की स्थिति बन रही है। विशेष रूप से सुबह दफ्तर जाने के समय और शाम को घर वापसी के पीक आवर्स में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाती है। छिजारसी कट, नोएडा सेक्टर-62 मॉडल टाउन गोलचक्कर, इंदिरापुरम क्षेत्र में कनावनी पुलिया और सीआईएसएफ (CISF) कट के पास वाहनों की लंबी-लंबी कतारें आम दृश्य बन चुकी हैं। चंद मिनटों का सफर तय करने में वाहन चालकों को 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का अतिरिक्त समय गंवाना पड़ रहा है, जिससे आम जनता में गहरा रोष व्याप्त है।

National Highway 9 (NH-9) Noida Ghaziabad जैसे 14-लेन वाले चौड़े और आधुनिक मार्ग पर जाम की मुख्य वजह वाहनों का बेतरतीब ठहराव, प्रमुख चौराहों पर बनने वाले बॉटलनेक, अनियोजित यू-टर्न और स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए अवैध कट हैं। मुख्य मार्ग से सर्विस लेन और स्थानीय सेक्टरों की ओर मुड़ने वाले बिंदुओं पर किसी भी प्रकार का लेन अनुशासन लागू न होने के कारण गाड़ियां एक-दूसरे में उलझ जाती हैं। परिणामस्वरूप, एक्सप्रेसवे से लेकर नीचे की संपर्क सड़कों तक वाहनों का पहिया थम जाता है और पीछे कई किलोमीटर तक गाड़ियों का रेला लग जाता है।

सेक्टर-62 और छिजारसी पर बेतरतीब बसें और रॉन्ग साइड ड्राइविंग बनी जाम की जड़

समस्या की सबसे प्रमुख जड़ नोएडा सेक्टर-62 और छिजारसी कट पर ट्रैफिक पुलिस के ढीले नियंत्रण के चलते सड़क किनारे खड़ी होने वाली निजी व डग्गामार बसें हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी बिहार की ओर जाने वाली ये निजी बसें एनएच-9 के सर्विस रोड और मुख्य कैरिजवे के मुहाने पर ही बेतरतीब तरीके से खड़ी होकर सवारियां भरती हैं। इन डग्गामार वाहनों और ऑटो-ई-रिक्शा चालकों के मनमाने पड़ाव के कारण तीन लेन वाली सड़क सिकुड़कर मात्र एक लेन की रह जाती है। जब भारी वाहन इस संकरे रास्ते से गुजरने की कोशिश करते हैं, तो पीछे आ रहे सभी हल्के वाहनों की रफ्तार पूरी तरह रुक जाती है।

इसके साथ ही, ट्रैफिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए विपरीत दिशा यानी रॉन्ग साइड से आने वाले वाहन चालकों ने स्थिति को और भी विकट बना दिया है। कनावनी पुलिया, सीआईएसएफ कट और छिजारसी के आसपास यू-टर्न की दूरी से बचने के लिए सैकड़ों दोपहिया, ई-रिक्शा और कार चालक विपरीत दिशा से घुस आते हैं। सामने से आ रहे तेज रफ्तार वैध ट्रैफिक और उल्टी दिशा से आने वाले वाहनों के आमने-सामने आने से न केवल भीषण जाम की नौबत आती है, बल्कि हर वक्त जानलेवा सड़क हादसों की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय लोगों की बार-बार की शिकायतों के बावजूद विपरीत दिशा में चलने वाले ऐसे लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ सख्त चालान या कानूनी कार्रवाई का अभाव साफ नजर आता है।

ट्रांस हिंडन और गाजियाबाद से नोएडा जाने वाले नौकरीपेशा लोगों पर दोहरा आर्थिक बोझ

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आईटी हब, सॉफ्टवेयर कंपनियों, मीडिया संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों का विशाल संजाल मौजूद है। इस कारण गाजियाबाद, इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली, कौशांबी, विजयनगर और पूरे ट्रांस हिंडन क्षेत्र से लाखों की तादाद में कामकाजी लोग प्रतिदिन अपनी आजीविका के लिए नोएडा का रुख करते हैं। सुबह 8:30 बजे से 11:00 बजे के बीच जब यह जनसैलाब एनएच-9 पर उतरता है, तो पूरा कॉरिडोर हांफने लगता है। यही स्थिति शाम को 6:00 बजे से 9:00 बजे के दौरान गाजियाबाद की ओर लौटने वाले रूट पर देखने को मिलती है।

घंटों जाम में फंसे रहने के कारण न केवल लोगों के कीमती समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि वाहनों के लगातार स्टार्ट रहने और पहले-दूसरे गियर में चलने से पेट्रोल-डीजल की भारी खपत हो रही है। इससे आम नौकरीपेशा वर्ग पर अप्रत्याशित आर्थिक बोझ पड़ रहा है। लगातार क्लच और ब्रेक दबाने से चालकों में मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और शारीरिक थकान बढ़ रही है। पर्यावरणविदों के अनुसार, जाम के दौरान रेंगते वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं ट्रांस हिंडन और नोएडा के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को भी खतरनाक स्तर पर पहुंचा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों को सांस संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थायी ट्रैफिक पुलिस तैनाती और पुख्ता इंजीनियरिंग सुधार की सख्त दरकार

दैनिक यात्रियों और स्थानीय आरडब्ल्यूए (RWA) प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक यातायात पुलिस द्वारा पीक आवर्स के दौरान संवेदनशील स्थानों पर स्थायी रूप से कर्मियों की तैनाती नहीं की जाएगी, तब तक हालात में सुधार संभव नहीं है। वर्तमान में चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की गैर-मौजूदगी के चलते ऑटो चालक और बसें मनमाने ढंग से बीच सड़क पर रुकती हैं। लोगों की मांग है कि छिजारसी कट, सीआईएसएफ गेट, सेक्टर-62 चौराहे और कनावनी मोड़ पर सुबह और शाम विशेष ट्रैफिक टास्क फोर्स को तैनात किया जाए, जो अवैध पार्किंग और विपरीत दिशा में चलने वाले वाहनों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय विकास प्राधिकरणों को मिलकर रोड इंजीनियरिंग की कमियों को दूर करना होगा। अनावश्यक व संकरे बॉटलनेक्स को चौड़ा करने, सर्विस रोड को अतिक्रमण मुक्त कराने, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटओवर ब्रिज बनाने और अवैध कटों को स्थायी कंक्रीट बैरियर लगाकर बंद करने की तत्काल आवश्यकता है। जब तक नियमों का कड़ाई से अनुपालन और सड़क सुधार का काम एक साथ जमीन पर नहीं उतरेगा, तब तक एनएच-9 का यह सफर लाखों यात्रियों के लिए रोज की अग्निपरीक्षा ही बना रहेगा।

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