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Berger Paints Q2 Results 2026: मुनाफा 5% और आय 13% बढ़ी, बढ़ती लागत के दबाव से निपटने के लिए कंपनी बढ़ा सकती हैं कीमतें

भारतीय शेयर बाजार, कॉर्पोरेट जगत और वित्तीय परिणामों के गलियारों से इस वक्त निवेशकों और कारोबार जगत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ताजा खबर सामने आ रही है। देश की जानी-मानी पेंट निर्माण कंपनी बर्जर पेंट्स (Berger Paints) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के अपने वित्तीय और कारोबारी नतीजे आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए हैं। शेयर बाजार के बंद होने के बाद घोषित किए गए इन नतीजों के अनुसार, कंपनी के कंसोलिडेटेड मोर्चे पर तो आय और शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर अच्छी बढ़त दर्ज की गई है, लेकिन कच्चे माल की लागत में लगातार हो रही तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव साफ तौर पर दिखाई दिया है। इस स्थिति से निपटने के लिए कंपनी ने आने वाले महीनों में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि बर्जर पेंट्स के लिए यह दूसरी तिमाही वित्तीय लिहाज से कैसी रही है और इसके आंकड़े क्या कहानी बयां करते हैं।

बर्जर पेंट्स के कंसोलिडेटेड नतीजे: नेट प्रॉफिट में 5.3% की बढ़त और रेवेन्यू पहुंचा 3,200 करोड़ रुपये पर

त्योहारी सीजन और निर्माण गतिविधियों के बीच बर्जर पेंट्स ने चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही के जो आंकड़े पेश किए हैं, उनके मुताबिक कंपनी का कुल प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 217 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 206 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया था।

इसके साथ ही, कंपनी की कुल आय यानी कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में भी शानदार उछाल देखने को मिला है। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 13.2 फीसदी बढ़कर 3,200 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2,827.5 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। हालांकि, मुनाफे की तुलना में कंपनी के ईबीआईटीडीए (EBITDA) की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। कंपनी का ईबीआईटीडीए 5.1 फीसदी बढ़कर 370 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 352 करोड़ रुपये था। मुनाफे और ईबीआईटीडीए की धीमी रफ्तार के कारण कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर पड़ा, और दूसरी तिमाही में कंपनी का ईबीआईटीडीए मार्जिन पिछले साल के 12.4 फीसदी से घटकर 11.6 फीसदी पर आ गया।

स्टैंडअलोन आधार पर कमजोर रहा प्रदर्शन: मुनाफे और EBITDA में आई गिरावट

जहां एक तरफ कंसोलिडेटेड आंकड़ों में कंपनी ने बढ़त दर्ज की, वहीं स्टैंडअलोन आधार पर बर्जर पेंट्स का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर नजर आया। दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से मिलने वाला स्टैंडअलोन रेवेन्यू 11.9 फीसदी बढ़कर 2,750.1 करोड़ रुपये रहा, जो कि पिछले साल की समान तिमाही में 2,458.5 करोड़ रुपये था।

लेकिन इसके विपरीत, कंपनी का स्टैंडअलोन ईबीआईटीडीए (अन्य आय को छोड़कर) 4.4 फीसदी की गिरावट के साथ 297.5 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 311.2 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, कंपनी के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में भी 7.3 फीसदी की सुस्ती देखने को मिली और यह घटकर 163.3 करोड़ रुपये पर आ गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर 176.3 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि घरेलू स्तर पर लागत का दबाव कंपनी के मूल कामकाज पर अधिक भारी पड़ा है।

कच्चे माल की महंगाई बनी बड़ी चुनौती: नवंबर और उसके बाद दाम बढ़ा सकती है कंपनी

बर्जर पेंट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अभिजीत रॉय ने परिणामों पर चर्चा करते हुए स्पष्ट किया है कि कच्चे माल (Raw Materials) की कीमतों में लगातार हो रही तेज बढ़ोतरी का पूरा असर इस तिमाही में कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल कच्चे माल की महंगाई कम होने के कोई भी स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं।

इस बढ़ती लागत के दबाव से अपने मुनाफे और मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। प्रबंधन के अनुसार, बर्जर पेंट्स नवंबर महीने और उसके बाद बाजार की मांग और जरूरत के अनुसार अपने पेंट उत्पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी लागू कर सकती है। इसके साथ ही, कंपनी लागत को नियंत्रित करने, परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) को और अधिक बेहतर बनाने के लिए कई अन्य रणनीतिक कदम भी उठा रही है, ताकि आने वाली तिमाहियों में निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके और प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर रखा जा सके।

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