धर्म

Sharad Purnima 2026 Moonrise Timing: दिल्ली, कानपुर, पटना और लखनऊ समेत आपके शहर में कब निकलेगा शरद पूर्णिमा का चांद

सनातन धर्म और हिंदू पंचांग में सालभर में आने वाली सभी पूर्णिमा तिथियों का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व होता है, लेकिन आश्विन मास की शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) को सभी पूर्णिमाओं में सबसे अधिक चमत्कारी, पवित्र और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साल की इसी एकमात्र रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। इस साल शरद पूर्णिमा का यह पावन पर्व 25 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन मनाया जा रहा है। इस खास रात को देश भर के करोड़ों घरों में चंद्रमा के दर्शन करने, मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने और खुले आसमान के नीचे खीर रखकर उसे अमृतमय बनाने की प्राचीन परंपरा निभाई जाती है। चूंकि भारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रोदय (Moonrise) के समय में थोड़ा अंतर होता है, इसलिए हर कोई यह जानना चाहता है कि उनके शहर में चांद निकलने का सटीक समय क्या रहेगा। आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषीय आकलन के आधार पर विस्तार से जानते हैं कि दिल्ली, कानपुर, पटना, लखनऊ समेत देश के प्रमुख शहरों में आज शरद पूर्णिमा का चांद कितने बजे निकलेगा।

शरद पूर्णिमा पर अमृत वर्षा और चंद्र दर्शन का क्या है धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व

हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की यह खूबसूरत रात केवल एक सामान्य रात्रि नहीं है, बल्कि यह भौतिक और आध्यात्मिक सुखों को प्राप्त करने की सबसे बड़ी रात है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन जगत की पालनहार माता लक्ष्मी रात्रि के समय पृथ्वी लोक पर भ्रमण के लिए निकलती हैं और वे यह देखती हैं कि कौन सा भक्त उनकी आराधना में लीन है। जो लोग इस रात विधि-विधान से मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसका गहरा वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक आधार भी है। आयुर्वेद के जानकारों का कहना है कि इस रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे अत्यधिक निकट होता है, जिसके कारण उसकी किरणों में विशेष औषधीय और चुंबकीय गुण समाहित होते हैं। यही कारण है कि हमारे घरों में इस रात दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखा जाता है, ताकि चंद्रमा की अमृतमयी किरणें उस पर पड़ सकें। अगले दिन सुबह इस प्रसाद को ग्रहण करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

देश के प्रमुख शहरों में शरद पूर्णिमा 2026 पर चंद्रोदय का अनुमानित समय

भौगोलिक स्थितियों और क्षितिज के अंतर के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में चंद्रमा के दिखने का समय अलग-अलग होता है। यदि आप भी आज चंद्र दर्शन और खीर रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो अपने शहर के अनुसार चंद्रोदय का यह अनुमानित समय जरूर नोट कर लें:

  • दिल्ली (NCR): शाम 04:55 बजे से 05:00 बजे के बीच

  • कानपुर: शाम 04:49 बजे से 04:50 बजे के बीच

  • लखनऊ: शाम 04:46 बजे से 04:47 बजे के बीच

  • पटना: शाम 04:31 बजे

  • प्रयागराज: शाम 04:45 बजे

  • वाराणसी: शाम 04:40 बजे

  • कोलकाता: शाम 04:21 बजे

  • जयपुर: शाम 05:06 बजे

  • भोपाल: शाम 05:05 बजे

  • मुंबई: शाम 05:28 बजे

  • चंडीगढ़: शाम 04:59 बजे

विशेषज्ञों का यह मानना है कि स्थानीय मौसम, बादलों की स्थिति और भौगोलिक ऊंचाइयों के आधार पर वास्तविक चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का मामूली अंतर आ सकता है, इसलिए अपने नजदीकी पंचांग या स्थानीय समयानुसार पूजा की तैयारी करना सबसे उचित रहता है।

शरद पूर्णिमा की रात कैसे करें मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा

शरद पूर्णिमा की इस पावन संध्या पर विधि-विधान से पूजा करने से घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती। पूजा से जुड़े कुछ मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

  • साफ-सफाई और दीपोत्सव: प्रदोष काल में अपने घर के मुख्य द्वार और मंदिर को अच्छी तरह साफ करके वहां घी के दीपक जलाएं, ताकि मां लक्ष्मी आपके घर में प्रवेश कर सकें।

  • मां लक्ष्मी को भोग: पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को कमल या सफेद रंग के पुष्प अर्पित करें, तथा खीर, मखाने और पतासे का भोग लगाएं।

  • चांदनी में खीर रखना: रात्रि के समय जब चंद्रमा पूरी तरह आकाश में चमकने लगे, तब चांदी या पीतल के बर्तन में खीर रखकर उसे किसी साफ सूती कपड़े से ढककर खुले आसमान के नीचे रख दें।

  • अगले दिन का प्रसाद: इस अमृतमयी खीर को अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद पूरे परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।

शरद पूर्णिमा की यह खूबसूरत और चमत्कारी रात आपके जीवन में ढेर सारी सुख-समृद्धि, आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए, ऐसी शुभकामनाएं हैं। आज के दिन चंद्रमा के दर्शन करके अपने जीवन को शीतलता और दिव्यता से भर लें।

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