गोरखपुर की प्रति व्यक्ति आय ₹1,06,510: जानिए सीएम के शहर के लोग पीएम मोदी के वाराणसी से कितने अमीर

उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य में पूर्वांचल के दो सबसे महत्वपूर्ण वीवीआईपी जिले—गोरखपुर और वाराणसी—हमेशा से नीति निर्माताओं और आम जनता के बीच चर्चा के केंद्र में रहते हैं। उत्तर प्रदेश के अर्थ एवं सांख्यिकी प्रभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों ने राज्य के इन दोनों प्रमुख शक्ति केंद्रों की आर्थिक क्षमता और जनसांख्यिकी समृद्धि का एक रोचक तुलनात्मक ब्योरा सामने रखा है। इन आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर जिले की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) 1,06,510 रुपये सालाना दर्ज की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की प्रति व्यक्ति आय 1,14,685 रुपये प्रति वर्ष आंकी गई है। आंकड़ों का सीधा विश्लेषण स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत आय यानी औसतन नागरिकों की सालाना कमाई के पैमाने पर वाराणसी के निवासी गोरखपुर से अधिक संपन्न हैं, लेकिन जब जिले की कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) यानी समग्र अर्थव्यवस्था के आकार की बात आती है, तो गोरखपुर ने काशी को काफी पीछे छोड़ दिया है।
सीएम योगी का कर्मक्षेत्र गोरखपुर: राजनीति, संस्कृति और व्यापार का तेजी से उभरता केंद्र
गोरखपुर का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व पूरे देश में सर्वविदित है। यह शहर उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अत्यंत प्रभावशाली धुरी माना जाता है, क्योंकि यहां से खुद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश विधानसभा में गोरखपुर शहरी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। मुख्यमंत्री बनने से पूर्व वे 1998 से लेकर 2017 तक लगातार पांच बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे और विगत नौ वर्षों से अधिक समय से प्रदेश की कमान संभालने के साथ इस क्षेत्र के विकास का निरंतर नेतृत्व कर रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक पटल पर भी गोरखपुर की अपनी विशिष्ट पहचान है। यहीं स्थित सुप्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर नाथ पंथ का सर्वोच्च वैश्विक केंद्र है, जिसके पीठाधीश्वर स्वयं योगी आदित्यनाथ हैं। इसके साथ ही भारतीय सनातन संस्कृति के ग्रंथों—श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण और महाभारत—को घर-घर तक पहुंचाने वाली ऐतिहासिक संस्था 'गीता प्रेस' इसी शहर की पहचान है। पिछले कुछ वर्षों में सड़क कनेक्टिविटी, एम्स (AIIMS), खाद कारखाने के पुनरुद्धार और औद्योगिक गलियारे (गीडा) के विस्तार से इस शहर की अर्थव्यवस्था में तेज उछाल देखा गया है।
गोरखपुर की प्रति व्यक्ति आय ₹1,06,510: अर्थव्यवस्था का कुल आकार पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर
उत्तर प्रदेश सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के आधिकारिक सांख्यिकीय बुलेटिन के अनुसार, गोरखपुर जिले की प्रति व्यक्ति आय 1,06,510 रुपये प्रति वर्ष दर्ज की गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिले में रहने वाले प्रत्येक नागरिक की औसत वार्षिक आय एक लाख छह हजार रुपये से अधिक है। यदि समग्र अर्थव्यवस्था यानी जिले की कुल जीडीपी (District Domestic Product) की बात करें, तो गोरखपुर ने विशाल आर्थिक गतिविधियों के बूते कुल 63,657.33 करोड़ रुपये का आकार छू लिया है। गोरखपुर का कृषि उत्पादन, स्थानीय उद्योग, रियल एस्टेट बूम, स्वास्थ्य सेवाओं का क्षेत्रीय केंद्र बनना और नेपाल सीमा से सटा बड़ा व्यापारिक हब होना इसकी कुल जीडीपी को एक मजबूत आधार प्रदान करता है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स पार्कों के निर्माण ने भी जिले के कुल आर्थिक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
वाराणसी से तुलना: प्रति व्यक्ति आय में काशी आगे, लेकिन कुल जीडीपी में गोरखपुर ने दी पटखनी
जब मुख्यमंत्री के क्षेत्र गोरखपुर की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से की जाती है, तो आंकड़े बेहद दिलचस्प आर्थिक तस्वीर पेश करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वाराणसी जिले की प्रति व्यक्ति आय 1,14,685 रुपये है, जो गोरखपुर की 1,06,510 रुपये की तुलना में 8,175 रुपये प्रति वर्ष अधिक है। यानी काशी का एक औसत नागरिक व्यक्तिगत आय के मामले में गोरखपुर के नागरिक की तुलना में ज्यादा कमाई कर रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के भव्य निर्माण के बाद पर्यटन, होटल इंडस्ट्री, रेशम और हथकरघा व्यापार, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) का अभूतपूर्व विस्तार है, जिसने स्थानीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय को तेजी से बढ़ाया है।
हालांकि, जब दोनों जिलों के कुल आर्थिक उत्पादन यानी संपूर्ण जीडीपी की तुलना की जाती है, तो बाजी पलट जाती है। वाराणसी की कुल जीडीपी 56,899.78 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि गोरखपुर की जीडीपी 63,657.33 करोड़ रुपये है। यानी जिले की कुल संपदा और उत्पादकता के मामले में गोरखपुर, वाराणसी से लगभग 6,757.55 करोड़ रुपये आगे निकल गया है। गोरखपुर का वृहद भौगोलिक क्षेत्रफल, बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन और तेजी से बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग बेस इसे समग्र जीडीपी में वाराणसी पर निर्णायक बढ़त दिलाता है।
पूर्वांचल के आर्थिक विकास में दोनों शहरों की भूमिका और भविष्य की संभावनाएं
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में गोरखपुर और वाराणसी की यह आर्थिक प्रतिस्पर्धा बेहद सकारात्मक संकेत दे रही है। वाराणसी जहां सेवा क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, धार्मिक संस्कृति और टेक्सटाइल के दम पर प्रति व्यक्ति आय के नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं गोरखपुर कृषि आधारित प्रसंस्करण, विनिर्माण, भारी उद्योग और क्षेत्रीय व्यापार के दम पर कुल जीडीपी के आकार को मजबूती से बढ़ा रहा है। दोनों वीवीआईपी क्षेत्रों में हो रहा भारी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश यह सुनिश्चित कर रहा है कि आने वाले समय में पूर्वांचल केवल राजनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी उत्तर प्रदेश के विकास का सबसे मजबूत इंजन बनकर उभरे।