42 साल बाद पहले गुरु के साथ किरण ट्रेनर में भरी उड़ान, पूरा हुआ जीवन चक्र

भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सैन्य वर्दी में अपने चार दशक से भी अधिक लंबे और गौरवशाली हवाई सफर को मंगलवार को एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक अंदाज में अलविदा कहा। अपनी आसन्न सेवानिवृत्ति से पूर्व वायु सेना प्रमुख ने एचजेटी-16 किरण एमके-1 (HJT-16 Kiran Mk-1) जेट प्रशिक्षण विमान में अपनी अंतिम उड़ान भरी। इस उड़ान की सबसे अभूतपूर्व और दिल छू लेने वाली बात यह रही कि कॉकपिट में उनके साथ उनके वही पहले उड़ान प्रशिक्षक (फ्लाइट इंस्ट्रक्टर) विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) सह-पायलट के रूप में मौजूद थे, जिन्होंने 42 वर्ष पूर्व वर्ष 1984 में उन्हें वायु सेना में लड़ाकू विमान उड़ाने का पहला ककहरा सिखाया था। वायु सेना प्रमुख का अपने पहले गुरु के साथ उसी ऐतिहासिक विमान में आकाश की ऊंचाइयों को छूना सैन्य इतिहास में गुरु-शिष्य परंपरा और अटूट आत्मीय रिश्ते का एक अद्वितीय और अमर उदाहरण बन गया।
कॉकपिट में गुरु-शिष्य की ऐतिहासिक जुगलबंदी: यू 707 किरण विमान में 55 मिनट का भावुक सफर
नई दिल्ली से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) ने 'यू 707' टेल नंबर वाले किरण ट्रेनर एयरक्राफ्ट में एक साथ उड़ान भरी। 55 मिनट की यह विशेष उड़ान केवल आसमान में चक्कर लगाने का सैन्य अभ्यास नहीं थी, बल्कि यह चार दशकों की अनवरत सेवा, त्याग, अनुशासन और सैन्य समर्पण का एक संपूर्ण जीवन चक्र था। रनवे से जैसे ही किरण विमान ने गर्जना करते हुए आसमान की ओर रुख किया, ग्राउंड पर मौजूद वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, युवा पायलटों और तकनीशियनों की आंखें इस ऐतिहासिक दृश्य को देखकर नम हो गईं। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के लिए यह सफर अपनी सैन्य वर्दी में सेवा का समापन करने के साथ-साथ उस पवित्र कॉकपिट और अपने पहले गुरु के सान्निध्य में लौटने का स्वर्णिम मौका था, जिसने 1980 के दशक में एक युवा कैडेट के रूप में उनके सपनों को वास्तविक पंख दिए थे।
28 जनवरी 1984 की पहली उड़ान की यादें हुईं ताजा, एयर चीफ बोले- 'एक सपना सच होने जैसा अनुभव'
सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद जब एयर चीफ मार्शल अपने पहले इंस्ट्रक्टर के साथ विमान से बाहर आए, तो उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अपने इस अनुभव को 'सपना सच होने जैसा' बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे वायु सेना करियर की शुरुआत इसी किरण विमान से की थी और आज उसी विमान में अपनी अंतिम आधिकारिक उड़ान पूरी करना एक अवर्णनीय अहसास है। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वे संभवतः भारतीय वायु सेना के एकमात्र ऐसे प्रमुख हैं, जो उसी विमान के सेवा में सक्रिय रहते हुए सेवानिवृत्त हो रहे हैं जिससे उन्होंने अपने करियर की पहली उड़ान शुरू की थी। उन्होंने अपने पहले प्रशिक्षक विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) के प्रति नतमस्तक होकर आभार व्यक्त किया और याद दिलाया कि ठीक 28 जनवरी 1984 को कोचर सर ने उन्हें इसी स्थान पर पहली बार किरण विमान उड़ाना सिखाया था। आज चार दशकों के बाद उसी स्थान पर, उसी विमान में और उसी गुरु के साथ वर्दी में अंतिम उड़ान भरकर उनके जीवन और करियर का चक्र पूरी तरह से संपूर्ण हो गया है।
सैन्य पायलटों के जीवन में प्रशिक्षक की भूमिका: औपचारिक ट्रेनिंग के बाद भी ताउम्र बने रहते हैं मार्गदर्शक
विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) की कॉकपिट में सहभागिता ने इस विदाई समारोह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल बना दिया। इसने उस मार्गदर्शक को एक बार फिर उसी छात्र के साथ खड़ा कर दिया, जो देश की समूची वायु सेना का सर्वोच्च कमांडर बनकर आज अपने करियर का औपचारिक समापन कर रहा है। सैन्य विमानन के क्षेत्र में प्रशिक्षक केवल उड़ान की तकनीकी बारीकियां नहीं सिखाते, बल्कि वे एक युवा कैडेट के भीतर असाधारण दबाव में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, फौलादी अनुशासन, अदम्य साहस और अटूट आत्मविश्वास का संचार करते हैं। औपचारिक प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के दशकों बाद भी गुरु और शिष्य के बीच यह सम्मान और अपनापन आजीवन बना रहता है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित एचजेटी-16 किरण विमान, जिसने भारतीय वायु सेना के हजारों जांबाज फाइटर पायलटों की कई पीढ़ियों को तराशने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, ने इस विदाई क्षण को और भी गौरवमयी बना दिया।
31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित संभालेंगे वायु सेना की कमान
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इस महीने के अंत में यानी 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायु सेना प्रमुख के पद से विधिवत सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति के पश्चात एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायु सेना के नए प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। एपी सिंह की इस विदाई उड़ान ने आसमान में उनके औपचारिक सैन्य सफर का समापन जरूर कर दिया है, लेकिन दशकों की सेवा के दौरान वायु सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और रणनीतिक मजबूती में उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक योगदान को भारतीय रक्षा इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। वहीं, एचजेटी-16 किरण विमान आने वाले समय में भी भारतीय वायु सेना के युवा कैडेटों को आसमान का योद्धा बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यों में अपनी सेवाएं निरंतर जारी रखेगा